Vimochan -Roohani Rooh-2014

14. Roohani    14. Vimochan

‘रूहानी रूह जा पांधीअड़ा’- काव्य संग्रह का विमोचन
दिनांक-रविवार 14 सितम्बर 2014 हिन्दी दिवस के शुभ अवसर पर सीता सिंधु भवन, सांताक्रूज, मुम्बई के एक भव्य समारोह में सुश्री देवी नागरानी के अनुदित काव्य संग्रह “‘रूहानी रूह जा पांधीअड़ा’ का लोकार्पण संपन्न हुआ। मंच पर सन्माननीय हस्ताक्षर जिनके हाथों विमोचन सम्पन्न हुआ वे रहे : श्रीमती पारु चावला, प्रमुख मेहमान श्री महेश चंदर , हमारे सिंधी के सिरमोर गुलोकार , सम्माननीय श्री जयराम रूपणी, हिंदवासी की प्रधान संपादिका शोभा ललचंदनी, देवी नगरानी और गीता बिंदरानी जी।
देवी नागरानी के इस अनुदित काव्य संग्रह में 50 अलग-अलग प्रान्तों के प्रबुध लेखकों की कविताओं का हिन्दी से सिंधी में अनुवाद हुआ है। अनेक प्रान्तों से स्थापित कवि व राष्ट्रकवि कुसुमाग्रज, विष्णु प्रभाकर, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, कुसुम अंसल…..! पुस्तक का स्वरूप देवनागरी लिपि में है, जो नव पीढ़ी को मधे-नज़र रखते हुए किया गया है।
पद्मश्री प्रो॰ राम पंजवानी जी की स्थापित यह संस्था ‘सीता सिंधु भवन’ पिछले 25 बरसों से सिद्धस्त साहित्यकार व सिंधी समाज के सम्माननीय दस्तावेज़ स्वर्गीय श्री ठाकुर चावला एवं उनकी पत्नी श्रीमति पारु चावला जी के निष्ठापूरक प्रयासों से चलाते आए। अब परंपरा बरकरार रखने के अथक प्रयास कर रहे हैं परिवार के सदस्य—उनकी सुपुत्रियाँ, नातिन अमृता। इस आंगन में सिन्धी साहित्य, संस्कृति एवं संगीत का संगम प्रत्यक्ष सामने आता है। यह उनके अनवरत अथक निष्ठा का नतीजा है जो आज हिन्द में भी सिन्ध की गूँज सुनाई देती है। संचालिका अमृता जी ने देवी जी के साहित्य सफ़र की बात करते हुए इस बात का खुलासा किया किया की अनुवाद सिन्ध और हिन्द के बीच का एक सेतु बनकर एक पुख्ता पल बन रहा है। भाषा की टहनियों पर प्रांत प्रांत के परिंदे आश्रय प रहे है, जो अपने आप में एक मुबारक क़दम है। यह देवी जी की अपनी लगन और मेहनत का प्रतिफल है। जयहिंद

Dr. Amrita Pritam Literary Award-2014

 

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On 7th September 2014, the Mahatma Phule Talent Reasearch Academy and SMT. Radhikatai pandya college of engineering, Nagpur on the event of felicitation of literary people, awarded Devi Nangrani with Dr. Amrita Pritam Literary National Award-2014 by the Vidyavachaspati of the institute, an Honrary Vice chancellor INOS International University,  Dr.Chandrbhan Bhoyar and Dr. Amar singh wadhan, National/international co-orinator, Dr. Sunil Sardar, organizer international sanshodhan, America, Dr. Kamal Singh, Vice chancellor Of Amravati University, Dr. Sukhlal Soshwah. The whole event was smoothly voiced by Dr. Anil Malokar. The hall was assembled by writers, poets, journalists, editors from all over india and abroad. Jaihind. The world renouned writer and laurette Dr. Prabodhkumar Govil (Jaipur), Dr. Gurucharan Kocher(Chandigarh), Dr. Sudheel Hasrat (Chandigarh), Dr. Sneh Bansal (From Chandigarh-College), Dr. Wagh.Shakuntala Pratap (Prof: College in sangli), Rajni Sigh, Ashok Kumar and Dr. Jaya Bansal From Bulandshahar) Vijay from (Andhra Pradesh), Dr. Rajni Singh, Alka Goyal (Delhi)  Jaihind

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साहित्य व साहित्यकार–112 सेमिनार

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दिनांक रविवार 31 अगस्त 2014 अखिल भारत सिंधी बोली एवं साहित्य प्रचार की ओर से 112 सेमिनार -“साहित्य व साहित्यकार” के तहत जानी मानी नामवर लेखिका व शायरा देवी नागरानी पर यह सेमिनार आयोजित हुआ। आयोजन शाम ५.३० बजे लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स, अंधेरी पूर्व के लाल साईं मंदिर, मुंबई में  साहित्यकारों, कलाकारों व पत्रकारों, समाज सेवी शख्सियतों की उपस्थिती में सम्पन्न हुआ।

प्रचार सभा के माननीय निर्देशक व अध्यक्ष श्री टेकचंद मस्त जी ने पुष्प गुच्छ देकर देवी जी व शोभा जी का सम्मान किया, और सेमिनार का संचालन सभा की सचिव प्राध्यापिका नीता पंजवानी ने पुरज़ोर ढंग से करते हुए मंचासीन मेहमानों का परिचय दिया। जनरल सचिव डॉ. बिनीता नागपाल ने देवी नागरानी के जीवन के कुछ पहलुओं पर, साहित्य यात्रा, लेखन में उनके योगदान के बारे में कई कोण रौशन किए। और उन्हें सभा की ओर से मोमेंटों प्रदान, व शाल से सम्मानित किया। देवीजी ने ज़िंदगी को एक सफर, एक महाजाल, एक मुक्ति द्वार कहते हुए अपने मनोभावों को ज़ुबान दी, और कुछ ग़ज़लों का पाठ किया।

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इस मौके पर सभा की ओर से प्रिंट मीडिया के सशक्त हस्ती शोभा ललचंदानी को भी अवार्ड व रिवार्ड दोनों पेश करते हुए सम्मानित किया। उपस्थित श्रंखला में मौजूद रहे शोभा जी के सुपुत्र आनंद, बेटी अमृता, बहू व परिवार के और सदस्य! शोभा बधाई उपस्थित मेहमानों नें कलाकार मदन जुमानी, सोनू चौधरी, श्री बिहारी शैरी, होतचंद पाहुजा, व उनकी पत्नी, गोप गोलनी जी, वीणा ढिंगरेजा,  हरिचन्द ढिंगरेजा,  लाल खत्री, माला जीयनदानी , चंदा वीरानी, श्रोताओं में शामिल रहे, बंसी खूबचंदानी, भारती अवतरामानी, श्री निर्मल मूलचंदानी, श्यामानन्द चाँद वानी, ब्रिज मोहन, व पूनम ब्रिज मोहन, गीता बिंदरानी, व उर्दू के जाने माने शायर अनजाना और अनेक श्रोता। इस योगदान के लिए अखिल भारत सिंधी बोली एवं साहित्य प्रचार की टीम बधाई के पात्र है। उत्साह और प्रोत्साहन का श्रेय भी उनकी इस साधना स्वरूप निष्ठा को जाता है जो सिंधी साहित्यकारों, कलाकारों का सम्मान करते हुए आज 112 समारोह सम्पन्न कर रहे हैं। जयहिंद

 

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