काव्य का छलकता हुआ जाम-कैलिफोर्निया में

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एक काव्य गोष्टी तारीख अक्तूबर 23 , बुधवार, 2013  सायं 6 बजे से 9  बजे  तक देवी नागरानी आप से साक्षात्कार के लिए तय हुई, जिसकी व्यवस्था लता मालवीय जी के निवास स्थान पर मिल्पिटस, कैलिफोर्निया में की रखी गयी.                                                                            सप्तरंगी शाम अपने साथ काव्य का छलकता हुआ जाम ले आई और मौजूद कविगन महफिल को काव्य के हर रंग से ओतप्रोत करते रहे। इस गोष्टी की संयोजक माननीय नीलू गुप्ता जी ने अपने अहसासों को ज़बान देते हुए कहा:

गुलाब की सुगंध, महका देती है चमन
आपने बन गुलाब महका दिया  मन….!!
गोष्टी में भागीदारी लेने वाले उपस्थित रचनाकार रहे, राखी शर्मा, अर्चना पांडा, अंशु जौहरी, कौशल्य कुमार, ओम पी॰ कालरा, नीलू गुप्ता, देवी नागरानी, सुधा राणा, निर्मला शुक्ल, श्याम शुक्ल जी, शैल जैन, बख्शीश संधु,  हेम प्रभा ओसवाल्ड, सुशील भाटिया, विनय श्रीवास्तव, योगी महेंद्र, लता मालवीय, मंजु मिश्रा, जी की उपस्थिती में सफलता से सम्पन्न हुई। गोष्टी का आगाज़ देवी नागरानी जी की ग़ज़ल से हुई, और फिर कड़ी अर्चना पांडा की काव्य ऊर्जा से खूब जुड़ी। अंशु जौहरी की रिक्तता में सींची हुई कविता की पगडंडी से होकर राखी शर्मा के सूखे पत्तों की चरमराहट की आहट पर थमी। फिर डोर को संभाला निर्मला शुक्ल, व श्याम शुक्ल जी जो  “विश्व हिंदी न्यास के कार्य में अपना योगदान देते रहे हैं- उन्होने अपनी कविता-एक रिश्ता है “ का पाठ किया। शब्दों में अर्थ होता है तर्क में नहीं –शैल जैन के कथन के सिरे से मंजु मिश्रा जी ने अपने मधुर आवाज़ में छेड़ा गीत-ग़ज़ल का सिलसिला जोड़ा।  Cali-1

सुधा राणा ने भारत है प्यारा देश –कविता सुनाकर भारतीय प्रवासियों के मन में एक भीनी हलचल पैदा की जिसको, सुशील भाटिया ने कोमल स्वरों से बुनी एक कोमलता के तारों की कविता सुनाई। हेम प्रभा ओसवाल्ड ने ‘पर कतराने लगी है दीवार पर कैंचियाँ’ मुग्ध करती हुई कविता सुनाई,  लता मालवीय जी ने माहौल में जोकेस सुनाये जिससे माहौल में एक खिलखिलाहट की मधुरता समाने लगी, कौशल्य कुमार जी ने “महफिल में जल उठी शम्मा’ गाना गाकर खूब वाह वाह बटोरी। विनय श्रीवास्तव ने एक पुसुकून ग़ज़ल सुनाई जिसका मिसरा  रहा-बेवजह रुख पर पड़ता नहीं नकाब/…बख्शीश संधु जी ने अपने बीते दिनों की पिटारी से कुछ शेर व अनुभव बताए, योगी महेंद्र ने योग पर बहुत कारगर बातें सुनाई और हास्यमय माहौल में कुछ और कड़ियाँ जोड़ी। ओम पी॰ कालरा जी श्रोता के रूप में मौजूद रहे। हाँ अदरणीय शकुंतला बहादुर जी से न मिल पाने की ख़लिश दिल में बाक़ी रह गई। अंत में नीलू गुप्ता जी ने भारतवर्ष की परंपरा को अपने शब्दों में कुछ इस तरह पेश किया की सभी के मन में भारतवासी होने का गर्व सर उठाने लगा। हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार के क्षेत्र में नीलू गुप्ता का योगदान एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है.इनका हिन्दी भाषा के प्रति निस्वार्थ सेवा भाव अपनाइयत के दायरे में लाकर खड़ा कर देता है। हिंदी शिक्षिका का कार्यभार स्वयंसेविका के रूप में सम्भाला.तत्पश्चात अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रान्त में स्थायी रूप से बसने के बाद हिंदी भाषा व भारतीय संस्कृति की धरोहर को अपनी नई पुरानी पीढ़ी को सौपने का बीड़ा ही उठा लिया.जब भी जहाँ भी अवसर मिला हिंदी भाषा की पताका को लेकर आगे बढ़ती रहीं.न केवल स्वयं आगे रहीं बल्कि अन्य हिंदी प्रेमी साथियों को भी साथ लेकर चलती हैं.

लता मालवीय जी की स्वागत व्यवस्था, रात के खाने के साथ मन में अपनेपन का बीज बो गया। उन्होने जिस स्नेह व आदर से अतिथि सत्कार किया वह उल्लेखनीय है, इसमें जिनका भी सहयोग रहा है वे सभी धन्यवाद की पत्र हैं।

 

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