“अशीर्वाद” की ओर से 24 घंटे का कवि सम्मेलन

शनीवार 13 Oct, 2012 शाम 4 बजे से

रविवार 14 Oct, 2012 शाम 4 बजे तक

मुंबई महनगरी में यह कार्यक्रम सफलता पूर्ण आयोजित हुआ और इस महयज्ञ में आशीर्वाद के अध्यक्ष श्री बृजमोहन अग्रवाल, निर्देशक उमाकांत बाजपई, उनकी श्रीमति व उनकी  तीनों बेटियाँ, जे॰ पी॰ बघेल जी का सहयोग निरंतर अथक रहा। इस महायज्ञ  के आठ सत्रों में लगभग 200 कवियों की पाठ करने की भागीदारी रही। जिसमें बारी बारी संचालन करते रहे खन्ना मुज़फ्फ़रपुरी, श्री अरविंद राही,  संतोष श्रीवास्तव, अनंत श्रीमली, युवराज जैन, और आलोक भट्टाचार्य। रात भर काव्य पाठ चलता रहा।2012 Ashirwaad 004

2012 Ashirwaad 012    और सबसे बड़ी और गौरवपूर्ण बात यह की काव्य पाठ के पश्चात हर कवि, कवियित्रि को प्रशस्ति-पत्र, शाल-सुमन के साथ सत्कार किया गया।

13 तारीख से वहाँ भोजन भंडार शुरू किया गया, दूसरे दिन 5 बजे के नाश्ते चाय तक निरंतर चलता रहा। इतना सुंदर आयोजन करने का सामर्थी आशीर्वाद के छात्र छाया में सफलता पूर्ण सम्पन्न हुआ॥!!

नवनीत के पूर्व मुख्य संपादक श्री गिरिजाशंकर त्रिवेदी,  निहालनी

अंजुमन संस्था के अध्यक्ष एवं प्रमुख शायर खन्ना मुज़फ्फ़रपुरी,

देवी नागरानी, श्रुति संवाद के अध्यक्ष श्री अरविंद राही, ह्यूमर क्लब के अध्यक्ष श्री शाहिद खान, कथाबिंब के संपादक श्री अरविंद राही , वनमाली चतुर्वेदी, सतीश शुक्ला, नवीन चतुर्वेदी, देवमणी पांडेय, संतोष श्रीवास्तव, सुमीता केशवा

नीरज गोस्वामी, मेघा श्रीमाली , श्री अनंत श्रीमाली, डॉ॰ लक्ष्मण वाहिद, प्रमिला शर्मा, नईमा इम्तियाज़, नेहां वैध्य, पूजा श्री,  संजीव निगम, शिल्पा सोनाटाके, सुषमा सेनगुप्ता, रत्ना झा, रेखा  रौशनी, मंजू गुप्ता, नंदलाल थापर,त्रिलोचन सिंह, ऊबेद आज़म, माया गोविंद, राम गोविंद, पूजा दीक्षित, हेमदासानी, ……और …..और…………..अनगिनत नाम!!!

देवी नागरानी

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हर दुआ हो गई बेअसर

गज़लः

बददुआओं का है ये असर
हर दुआ हो गई बेअसर.

ज़ख्म अब तक हरे है मिरे
सूख कर रह गए क्यों शजर.

यूं न उलझो किसी से यहां
फितरती शहर का है बशर.

राह तेरी मेरी एक थी
क्यों न बन पाया तू हमसफ़र.
वो मनाने तो आया मुझे
रूठ कर ख़ुद गया है मगर.

चाहती हूं मैं ‘देवी’ तुझे
सच कहूं किस क़दर टूटकर.

Friends of International Sindhis-Seminar

2012 Nov Sindhi 005रविवार दिनांक 25 नवम्बर 2012, Friends of International Sindhis  की ओर से आयोजित सेमिनार “सिंधी भाषा और नई पीढ़ी” गोविंदधाम, खार, मुंबई में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक सफलता पूर्ण रूप से सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम का आगाज ज्योत जगाकर किया गया, जहां मौजूद रहे संस्था के चेयरमैन श्री मुरली अदनानी, हरेश मीरचंदानी, डॉ॰ कविता लालचंदानी, होतचंद आडवाणी (कॉलेज प्रिन्सिपल), श्री होलराम हंस, टेकचंद मस्त, मनोहर देव, विजय लखानी।

इस कार्यक्रम को दो सत्रों में अंजाम दिया गया। पहले सत्र में इस विषय पर छः  पेपर पढे गए जहां सभी ने अपने अपने विचार पेश किए, कि किस प्रकार नई पीढ़ी के लिए कारगर व्यवस्थाएँ ज़ारी करनी चाहिए ताकि वे अपनी भाषा से खुद को जोड़ पाएँ।

(लक्ष्मण सजनानी, शोभा बंभवानी, वीणा शिरंगी, मुरली अदनानी, काजल केवलरामनी, देवी नागरानी, माखीजा जी, डॉ॰ सतराम माखीजा)

पठनीयता के लिए देवनगीरी लिपि को प्रयोग में लाने के लिए प्रस्ताव रखे गए। सिन्धी तीज त्योहार का प्रसारण आधुनिक धनद से किया जाना चाहिए। प्रपत्र पढ़ने वाले रहे -डॉ॰ जेठो लालवानी (अहमदाबाद), वीणा शिरंगी (दिल्ली), देवी नागरानी (मुंबई), सरिता शर्मा (ठाणे), मीना रूपचंदनी (उलहासनगर), पंडित सुदर्शन शर्मा(माहिम)। सत्र की अध्यक्षता की लेखक होलराम हंस, व श्री टेकचंद मस्त ने। सभी साहित्यकारों का व मुखी महमानों का शवल, सुमन से सत्कार हुआSanmaan

दूसरे दौर में मशहूर पत्रकार प्रेम तोलानी, मदन जुमानी ने भी अपने वीचार भाषा और नौजवान पीढ़ी को लेकर सामने रखे। अंत में अध्यक्षता के रूप में दोनों अध्यक्षों ने प्रतिकृया स्वरूप सामने रखे। पेपरॉन में जो सुझाव सामने आए वे सकारात्मक व सार्थक लगे।

सम्मेलन में उपस्थित अन्य मुख्य महमान जो मौजूद रहे वे थे-जीतू जगवानी, उत्तम खुशालानी, अशोक रामचंदनी, भाऊ हरेश मीरचनदानी, लक्ष्मण भगतानी, लधाराम नागवानी, श्री किशन वरयानी, बलराम कुकरेजा, नंदलाल बजाज, श्री नारी सावलानी, शोभा लालचंदानी, राम लालचनदानी, साजन नारवानी, व सुधा नारवानी, गायिका काजल चंदीरामानी, रेलु गेहानी,  घनश्याम दूदानी, लाल खत्री, प्रेम वरयानी, टी मानवानी आनंद।

इस सेमिनार को सफल बनाने में जिनकी सक्रिय भागीदारी व सहकार रहा वे थे डॉ॰ सतराम माखीजा, बिहारी शहरी, शोभा भंभवानी, लक्ष्मण सजनानी। दिन भर चाय नाश्ते, दुपहर के भोजन का अच्छा आयोजन किया गया। जयसिंध जयहिंद

देवी नागरानी

दिल्ली सिंधी अकादमी- राष्ट्रीय कवि सम्मेलन

दिनांक 20 जनवरी 2013 दिल्ली सिन्धी अकादमी की ओर से आयोजित राष्ट्रीय सिन्धी कवि सम्मेलन दिवंगित वरिष्ठ सिंधी शायर-साहित्यकार हरी दिलगीर की याद में एवं गणतन्त्र दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण संस्कृतिक कार्यक्रम  श्रीराम भारतीय कला केंद्र, कापर निकस मार्ग, न्यू दिल्ली में सम्पूर्ण हुआ। समारोह का उदघाटन ज्योत जागकर किया गया, जिसमें विशेष रही प्रोफ़ेसोर किरण वालिया, दिल्ली अकादेमी के वाइस चेरमेन डॉ॰ मुरलीधर जेटले और अन्य मुख्य मेहमान।

कार्यक्रम का संचालन दक्षता के साथ किया अकादेमी की सचिव सिंधु भागिया जी ने। शुरूवात हुई देश भक्ति के गायन, क़ौमी तरानों से हुआ, और फिर बच्चों ने खास देश भक्तों की ज़िंदगी की झलकियाँ व झाँकियाँ पेश की।

सिंधी कवि पाठ में शिरकत करने वाले रहे:      Delhi Mushaira     अर्जन हासिद, भगवान अटलानी, देवी नागरानी, ढोलण राही, गोपाल ठकर, हरेश करमचंदानी, हीरो ठाकुर, जगदीश रावतानी, कैलाश शादाब, खेमन मुलानी, लछमन भाटिया कोमल, मोहन हिमतानी, मोहनी  हिंगोरानी, डॉ॰ नंदलाल जोतवानी, नामदेव तराचंदानी, नीलु मेघ, डॉ॰ प्रेम प्रकाश, रश्मी रामानी, रतन इसरानी, डॉ॰ रवि प्रकाश टेकचंदानी, शलिनी सागर, विनोद आसूदनी, वासदेव मोही और वीणा शिरंगी व जया जाधवानी। सदर शायर श्री आनंद खेमानी ने इस मौक़े पर सिंधी बाल उत्सव में शिरकत करने वाले बच्चों को कौमी तराने पेश करने में समर्थता  दरशाई!!A

कार्यक्रम 2 बजे से शाम 7 बजे तक चलता रहा और उस खुशनुमा माहौल में एक देश भक्ति का जज़्बा फिज़ाओं में में फैल  रहा था॰ जयसिंध, जयहिंद !!

 

बेलापुर-हिन्दी-उर्दू कवि सम्मेलन

27 Jan

संकल्प वेलफ़ैयर असोशिएशन द्वरा आयोजित विशाल हिन्दी-उर्दू कवि सम्मेलन, संस्था के अध्यक्ष डॉ॰ जी एल करनानी की उपस्थिति में, २७ जनवरी २०१३ की शाम को  नवी मुंबई आर्ट फेस्टिवल at urban Hatt (ampitheater) बेलापुर में एक सुहानी शाम का समा बांधने में कामयाब रहा। इसमें शिरकत करने वाले हिन्दी और उर्दू के कवि, शायर मिली जुली गंगो-जमन की काव्य सरिता को 6-9 बजे तक कलकल प्रवाहित करते रहे। श्री अनंत श्रीमाली के सशक्त संचालन में इतनी शिद्दत रही कि आर्ट फेस्टिवल के कई सेक्टर्स से लोगों का हुजूम 27 Jan- Artआवाज़ पर बंधा चला आया और काव्य का रसपान करता रहा। काव्य में शामिल था हास्य, व्यंग, प्रेम गीत, तीखे  तेवरों में डूबी रचनाएँ! शिरकत करने वाले रहे –दायें से बाएँ राजेश टैगोर, मीनू मदान, डॉ॰ लक्ष्मण शर्मा वाहिद, ख़न्ना मुज़फ्फ़पुरी,  श्रीमती देवी नागरानी, श्रुति संवाद के अध्यक्ष श्री अरविंद राही, संस्था के अध्यक्ष श्री जी एल करनानी, प्रमिला शर्मा, अनंत श्रीमाली, प्रतीक दवे और दिलशाद सिद्दीकी। माहौल में मधहोशी के साथ सुरूर शामिल रहा। करनानी जी ने सभी शायरों का पुष्प गुच्छ से अभिनंदन व धन्यवाद किया। और अंत में खाने का उतम प्रबंध रहा। जयहिंद

देवी नागरानी

TNHA-विश्व हिन्दी दिवस 2013

 Sahity Setu Sanmaan

Sahity Setu Sanmaan

तमिलनाडू हिन्दी अकादमी एवं धर्ममूर्ति राव बहादुर कलवल कणन चेट्टि हिन्दू कॉलेज, चेन्नई के संयुक्त तत्वधान में आयोजित विश्व हिन्दी दिवस एवं अकादमी के वर्षोत्सव का यह भव्य समारोह 10 जनवरी 2013, सफलता पूर्ण सम्पन्न हुआ। उपस्थित मुख्य अतिथि रहे श्री सुनील चोपड़ा,( आयकर ऑम्ब्ड्स्मैन -चेन्नई तथा पांडुचेरी), केंद्रीय हिन्दी समिति के सदस्य, प्रख्यात तेलुगू-हिन्दी साहित्यकार तथा तमिलनाडू हिन्दी अकादेमी के अध्यक्ष श्री बलशौरि रेड्डी जी, उन्होने हिन्दी दिवस के महत्वता पर रोशनी पेश करते हुए, दक्षिण भारत तथा चेन्नई महानगर को एक उर्वरा भूमि कहा। इसमें कोई अतिश्य्योक्ति नहीं, सकारात्मक व सार्थक प्रयास वहाँ जिस निष्ठा के साथ हिन्दी सेवी कर रहे हैं, उन्हें बधाई।SSSanmaan

आजीवन हिन्दी सेवा सन्मान की शिरोमणि विभूतियाँ डॉ॰ एन॰ सुंदरम, डॉ॰ एम॰ शेषण, डॉ॰ आर॰ शौरिराजन, डॉ॰पी॰ के॰ बालसुब्रमण्यम, डॉ॰ एस॰ सुब्रसुब्रह्मणियन ‘विष्णुप्रिया’ का सन्मान हुआ। अन्य राज्यों से हिन्दी विद्वान डॉ॰ कुसुम गीता (कर्नाटक), डॉ॰ जे रामचंद्रन नायर (केरल), श्रीमति देवी नागरानी (महाराष्ट्र-साहित्य सेतु सन्मान) डॉ॰ पी वी जगनमोहन (उत्तर प्रदेश) का भी सन्मान हुआ।DSC_1054

हिन्दी भाषा एवं साहित्य के विकास के योगदान के लिए  साहित्य सन्मान दिया गया-डॉ॰ निर्मला एस मौर्य (चेन्नई), डॉ॰ ए भवानी(तिरुनेलवेली), श्री प्रहलद श्रीमली (चेन्नै), श्री वी आर सुरेश( उडुमलपेट), डॉ॰ जयशंकर बाबू (पुदुचेरी), डॉ॰ एस बशीर (चेन्नै) श्रीमती के वी यमुना (चेन्नै) का सन्मान किया गया।TNHA group

  भोजन के उपरांत आयोजित वार्षिकोत्सव में पहले संस्कृतिक कार्यक्रम हुआ, जिसमें देवी नागरानी का ग़ज़ल प्रस्तुतीकरण, स्वर्ण वर्षा गुरुमूर्ति का एकल भरतनाट्यम, पी जान विल्लियम टीम का लाजवाब मूक नाटक प्रस्तुतीकरण तथा एस एम विनोदिनी, अनिता, भावना का एकल गायन सम्पन्न हुआ।

Swarn Varsha

देवी नागरानी के नेत्रत्व में आयोजित कवि-गोष्टी में विशेष रहे प्रहलाद श्रीमाली, संचालक अनिल अवस्थी और मौजूद शायर: श्री शशिलेन्द्र कुमार गुप्त, श्री जवाहरलाल मधुकर, प्रो॰ सी मनिकंठन, श्री सुमन अग्रवाल, पी आर वासुदेवन, संजय रामन, कुमारी नेहा प्रियदर्शिनी, जमुना कृष्णराज, श्रीमती रजनी, श्री एन गुरुमुर्ति, श्री उदय मेघानी, श्रीमती जैनब बी, मंजु रस्तोगी, दिलीप चंचल, भारत कुमार, प्रो॰ जैनब  बी,  मिट्ठू मिठास, कार्यध्यक्ष श्रीकृष्ण चंद चौरडिया ने सभी का स्वागत किया।

जिस निष्ठा से हिन्दी सेवी शागिर्दों ने इस कार्यक्रम में सहयोग दिया वह काबिले तारीफ़ है, सहयोगी शागिर्दों का सुमन और पदक से सन्मान एक प्रोत्साहजनक क़दम रहा। अनेक विध्यार्थियों को stationary प्रदान की गई। शिक्षा के क्षेत्र में यह प्रयास एक मार्गदर्शन का प्रतिनिधित्व कर रहा है।

सम्मेलन में कुछ प्रस्ताव पारित हुए जिनके सशक्त समाधान हासिल करने की संभावनाओं के द्वार इस विकास की राह पर खुले हुए हैं। श्री बलशौरि रेड्डी जी ने , डॉ॰ सज्जन मेहता, श्रीमती मेहता, देवी नागरानी, श्री सुमन अग्रवाल जो सेवा समिति के प्रतिनिधित्व में करी कराते रहते हैं, सभा को संबोधित किया। समारोह समार्पण राष्ट्रगान के साथ हुआ, राष्ट्रीय एकता, साहित्य-संस्कृति की तरंगें फिज़ाओं में फैलती रही, जय हिन्द, जय हिन्दी।

देवी नागरानी

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