26 january 2012 Gantantra Diwas

जीवन ज्योति पुरुसकार देते हुए आर त्रिपाठी एवं डॉ। किशोर सिंह( काँग्रेस अधिकारी), श्री विध्यार्थी सिंह, नागेंद्र मिश्रा, श्री राजू॰ आर॰ यादवनीलिमा दुबे, रेख लाल

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National Seminar in Delhi

National Seminar on The Women writers in Sindhi Literaure ON 19,20 November 2011 in Delhi  

Chied Guest: Smt Sheela Dixit, Khas Mehmaan Prof: KIran Walia, Padmashri Shanti Hiranandani

Ahyaks: Shri Murlidhar jetley  All on Stage

द्वि-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद

महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी के सहयोग से एसआयईएस कॉलेज के हिन्दी विभाग एवं कथा यू.के.(लन्दन) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित द्वि-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद २७-२८ जनवरी २०१२ प्रवासी हिंदी साहित्य:उपलब्धियां और अपेक्षाएं

प्रवासी साहित्य की आलोचना का नया मापदंड विकसित किया जाय महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी के सहयोग से एसआयईएस कॉलेज के हिन्दी विभाग एवं कथा यू.के. लन्दन के संयुक्त तत्वावधान में प्रवासी हिन्दी साहित्य उपलब्धियां और अपेक्षाएं विषय पर आयोजित द्वि-दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय परिसंवाद में प्रवासी लेखकों ने कहा कि उनके साहित्य की आलोचना परंपरागत मापदंडों से नहीं की जा सकती.

एसएनडीटी महिला विद्यापीठ की पूर्व कुलगुरु डॉ. चंद्रा कृष्णमूर्ति की अध्यक्षता में महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी के कार्याध्यक्ष डा. दामोदर खडसे ने परिसंवाद का उद्घाटन करते हुए कहा कि प्रवासी साहित्यकारों ने विश्व स्तर पर हिन्दी भाषा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. विशेष अतिथि के रूप में लन्दन (यू.के.) से पधारी कथाकार जकिया जुबैरी ने कहा कि आलोचक हमें बताएं कि उनकी प्रवासी साहित्य से क्या अपेक्षाएं है. मुख्य अतिथि डॉ. असगर वजाहत ने बीज वक्तव्य में कहा कि प्रवासी लेखन ने विगत दो दशकों में अपनी विशिष्ट पहचान बना ली है. उसे किसी से अपनी जगह पूछने कि जरूरत नहीं है. उन्होंने जोर दिया कि प्रवासी साहित्य के दायरे में पाकिस्तान और बंगलादेश को भी शामिल किया जाना चाहिए. परिसंवाद के आरम्भ में प्राचार्या डॉ.हर्षा मेहता ने महाविद्यालय एवं हिन्दी विभाग द्वारा किये जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की चर्चा करते हुए अतिथियों का स्वागत किया. हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ.संजीव दुबे ने परिसंवाद की प्रस्तावना प्रस्तुत की.
विषय प्रवर्तन करते हुए प्रसिद्ध कथाकार और कथा यू.के. के महासचिव तेजेन्द्र शर्मा ने कहा कि परंपरागत आलोचना प्रवासी साहित्य के साथ पूरा न्याय नहीं कर सकती. अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद के प्रवासी साहित्य की अवधारणा पर केंद्रित प्रथम सत्र में डॉ.रामजी तिवारी(पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष,मुंबई विश्वविद्यालय), डॉ.श्याम मनोहर पाण्डेय (पूर्व प्रोफ़ेसर,ओरिएंटल विश्वविद्यालय), श्री सुंदरचंद ठाकुर (सम्पादक,नवभारत टाइम्स) ने महत्वपूर्ण विचार रखे. प्रवासी लेखकों में सुश्री जकिया जुबैरी(यू.के.), श्री तेजंद्र शर्मा(यू.के.), श्रीमती नीना पॉल (यू.के.), श्रीमती देवी नागरानी (यू.एस.ए.),डॉ.अनीता कपूर(यू.एस.ए.),श्रीमती अंजना संधीर(यू.एस.ए.) एवं श्री उमेश अग्निहोत्री (यू.एस.ए.) श्रीमती स्नेह ठाकुर (कनाडा) ने प्रवासी साहित्य के विविध पक्षों पर महत्वपूर्ण वक्तव्य दिए.

 प्रवासी साहित्य पर अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद के पहले दिन कि शाम प्रवासी कवि सम्मेलन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कारण यादगार बन गयी. श्री देवमणि पाण्डेय के संचालन में सुश्री जकिया जुबैरी (यू.के.), श्री तेजंद्र शर्मा (यू.के.), श्रीमती नीना पॉल (यू.के.), श्रीमती देवी नागरानी (यू.एस.ए.), डॉ. अंजना संधीर (यू.एस.ए.) एवं श्रीमती स्नेह ठाकुर (कनाडा) ने अपनी ताजी कविताओं का पाठ किया. महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने रंगारंग नृत्य-गीत प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया. प्रवासी साहित्य कि अवधारणा, प्रवासी हिन्दी कविता, प्रवासी हिन्दी कहानी, प्रवासी हिन्दी उपन्यास तथा विविध विधाओं में लिखे जा रहे प्रवासी साहित्य पर केंद्रित विभिन्न सत्रों में कथाकार श्रीमती सूर्यबाला, श्रीमती सुधा अरोड़ा, डॉ.हरियश राय, डॉ.एम.विमला (बंगलोर), डॉ.शांति नायर(केरल) डॉ.विजय शर्मा(जमशेदपुर) डॉ.लालित्य ललित (दिल्ली) ने अपने विचार रखे. डॉ. सुमन जैन, डॉ. सतीश पाण्डेय, डॉ.एस.पी.दुबे, डॉ. अनिल सिंह, डॉ.शशि मिश्रा, डॉ.उषा राणावत, डॉ.उषा मिश्रा, श्रीमती मधु अरोड़ा, श्रीमती रेखा शर्मा, सुश्री अजंता शर्मा (दिल्ली) डॉ. मिथिलेश शर्मा, श्री दिनेश पाठक, डॉ.मनीष मिश्रा, डॉ.अशोक मरडे, डॉ.संदीप रणभिरकर, सुश्री गीता सिंह, श्री एस.एन.रावल, डॉ.श्यामसुन्दर पाण्डेय, डॉ.जयश्री सिंह, श्रीमती तबस्सुम खान अनेक प्रवासी रचनाकारों के अवदान पर केंद्रित प्रपत्र प्रस्तुत किये. इन प्रपत्रों में उषा प्रियम्वदा, सुषम बेदी, जकिया जुबैरी, तेजेन्द्र शर्मा, सुधा ओम ढींगरा, सुदर्शन सुनेजा, रेखा मैत्र, जय वर्मा, नीना पॉल, दिव्या माथुर, उषा राजे सक्सेना, पुष्प सक्सेना, उमेश अग्निहोत्री, अर्चना पैन्यूली आदि प्रवासी साहित्यकारों के अवदान पर चर्चा की गयी. उक्त प्रपत्रों के अतिरिक्त प्रवासी साहित्य की विभिन्न प्रवृत्तियों पर भी वक्ताओं ने अपने विचार रखे. परिसंवाद में मुंबई के प्रतिष्ठित रचनाकारों, समीक्षकों, पत्रकारों एवं प्राध्यापकों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही. “प्रपत्र वाचक” खास बधाई के पात्र हैं, क्योंकि उन्होनें कठिन प्रयासों से प्रवासी लेखन को पढ़ा, चिंतन-मनन करके अपने चुनाव के प्रवासी भारतीय रचनाकार के बारे में डूबकर उनके काव्य, कहानी, उपन्यास की कड़ियाँ जोड़कर, अपने प्रपत्र को सोच और शब्दों में बुनकर बहुत ही स्रजनात्मक ढंग से अपने-अपने विषयों पर रौशनी डाली। यह अपने आप में एक उपलब्धि है। समार्पन सत्र की अध्यक्षता की SIES कॉलेज की प्राचार्या डॉ॰ हर्षा मेहता ने, विशेष अतिथि रहे डॉ॰ लालित्य ललित( संपादक, नैशनल बूक ट्रस्ट, नयी दिल्ली) । अंत में इस अधिवेशन के संयोजक एवं हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ॰ संजीव दुबे जी ने सभी विशेष महमानों, वरिष्ठ साहित्यकारीं का आभार प्रकट किया। SIES कालेज और कथा UK के सफल प्रयासों के लिए प्राचार्या डॉ॰ हर्षा मेहता जी, इस अधिवेशन के संयोजक एवं हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ॰ संजीव दुबे जी, UK कथाकार के सचीव श्री तेजेंद्र शर्मा जी, परिसंवाद के आयोजन में डॉ. उमा शंकर, प्रो.रजनी माथुर, प्रो.लक्ष्मी, प्रो.कमला, प्रो. सुचित्रा, प्रो. सीमा, प्रो.शमा, प्रो.वृशाली ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई. और कालेज के तमाम स्टाफ को मेरी ओर से दिली बधाई व शुभकामनायें। जयहिंद ! देवी नागरानी

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