श्री विनय मिश्र जी के सन्मान में

दिनांक २८, अक्टूबर २०११, मुंबई, बांद्रा में श्रीमती देवी नागरानी के निवास स्थान पर दिल्ली से पधारे प्रख़्यात लेखक श्री विनय मिश्र के सन्मान में एक गोष्टी का आयोजन हुआ जिसमें शाम को सुरमई बनाने में शिरकत करने वालों में शायर जनाब खन्ना मुज़्ज़फ़रपुरी अध्यक्ष के पद पर आसीन हुए, श्री विनय मिश्र मुख्य महमान रहे,  डा. राजम नटराजन पिल्लैः संपादक कुतुबनुमा,  मुरलीधर पांडेयः संपादक संयोग सहित्य, श्री नीरज कुमार,   प्रो॰रत्ना झा,   आर. डी. नैशनल कालेज की हिंदी विभाग की अध्यक्षा डा॰ संगीता सहजवानी. ग़ज़लकार शिवदत अक्स, व सुप्रिया जाधव.  संचालन का भार संभाला प्रो॰ रत्ना झा ने संभाला.

मुरलीधर पांडेय, नीरज कुमार, रत्ना झा, विनय मिश्र जी एवं खन्ना मुज़्ज़फ़रपुरी

 सुरमई शाम का आगाज़ मधुर कंठ से नीरज कुमार ने ” वीणा वादिनी वर दे” सरस्वती वंदना से किया. तस्वीर में नीरज जी गाते हुए. शिवदत जी ने दो ग़ज़लें गाई, सुप्रिया ने लताजी की एक ग़ज़ल ” यूँ हसरतों के दाग़ मुहब्बत में धो लिये” प्रस्तुत की. मुरलीधर जी ने क्लासिकल धुनों में सजाई अपनी दो ग़ज़लें पेश की और सभी की फरमाइश पर एक गीत भी गाया. डा॰ राजम जी ने “तुम्हारा अपना नाम क्या है गांधारी?” एक मुसलसल सिलसिलेवार कविता पढ़कर अपनी दक्षता का सिक्का जमाया. डा॰ संगीता ने भी सामाजिक सरोकारों, भ्रष्टाचारों को शब्दों में बुनकर सच के सामने एक आइना पेश किया. देवी नागरानी ने अपनी ग़ज़लें पेश की जिस में से एक का मतले रहाः

कुछ न कहकर भी सब कहा मुझसे

जाने क्या था उसे गिला मुझसे

रत्ना झा ने पहली बार अपनी रचना ” तुम अच्छा बोतले हो” का पाठ किया तो मंचासीन वाह वाह कहे बिना न रह पाये. आगाज़ के अंत की ओर आते बेताबियां बढ़ी और श्री विनय मिश्रा जी ने समां बांधते हुए दोहे व दोहा ग़ज़ल से सभी का मन मोह लिया.

क्या पूजा क्या बंदगी क्या सजदे, अरदास 

सब से ऊंची साधना, बचा रहे अहसास

Ratna jha, Vinay mishr, Khanna, Deviji

खन्ना जी ने अध्यक्षता के शब्दों के साथ साथ अपने नये तेवरों से हास्य व व्यंग पर अपनी नई रचनाएं सुनाई और अपने पद को अंजाम तक ले आए.

शब्द के पुष्प जो पिरोते हैं

वो बड़े ख़ुशनसीब होते हैं

सभी रचनाकार अपनी रचनाओं से एक समाँ बांधने में सक्षम रहे. इस मधुरतम वातावरण में देवी जी ने विनय मिश्रा जी का शाल से सन्मान किया.

काव्य गोष्टी सफलता पूरक संपूर्ण हुई. देवी नागरानी ने सभी कविगण का तहे दिल से आभार व्यक्त किया.  मधुर वातावरण में जलपान के साथ शाम ढली. जयहिंद

देवी नागरानी

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