रज़ा रब की पाई

गजलः
नहीं उसने हरगिज रज़ा रब की पाई
न जिसने कभी हक की रोटी कमाई.

रहे खटखटाते जो दर हम दया के
दुआ बनके उजली किरण मिलने आई.

मिली है वहां उसको मंज़िल मुबारक
जहां जिसने हिम्मत की शम्अ जलाई.

खुदी को मिटाकर खुदा को है पाना
हमारी समझ में तो ये बात आई.

रहा जागता जो भी सोते में देवी
मुक़द्दर की देता नहीं वो दुहाई.

Advertisements

3 टिप्पणियाँ

  1. जुलाई 30, 2011 at 4:32 पूर्वाह्न

    मिली है वहां उसको मंज़िल मुबारक
    जहां जिसने हिम्मत की शम्अ जलाई.
    बहुत खूब!

  2. जुलाई 30, 2011 at 1:29 अपराह्न

    वाह क्या बात है
    खुदी को मिटाकर खुदा को है पाना
    हमारी समझ में तो ये बात आई.

  3. Devi Nangrani said,

    अगस्त 26, 2011 at 3:53 अपराह्न

    Nirmala ji evam Girdharji
    aapka sneh mujhe is protsahan ke kabil banaye rakhe
    shubhkamnaon sahit


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

  • Blog Stats

  • मेटा

  • %d bloggers like this: