रज़ा रब की पाई

गजलः
नहीं उसने हरगिज रज़ा रब की पाई
न जिसने कभी हक की रोटी कमाई.

रहे खटखटाते जो दर हम दया के
दुआ बनके उजली किरण मिलने आई.

मिली है वहां उसको मंज़िल मुबारक
जहां जिसने हिम्मत की शम्अ जलाई.

खुदी को मिटाकर खुदा को है पाना
हमारी समझ में तो ये बात आई.

रहा जागता जो भी सोते में देवी
मुक़द्दर की देता नहीं वो दुहाई.

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सुधा ओम ढींगरा जी के निवास पर गोष्टी

११ जूलाई २०११ रैले में सुधा ओम ढींगरा जी के निवास स्थान पर एक यादगार गोष्टी का आयोजन हुआ जिसमें भागीदारी रही नार्थ कैरोलिना के साहित्य प्रेमी जो अपने आप में एक संस्था से कतई कम न थे. अपनी रचनाओं से एक समाँ बांधने में सक्षम रहे. गोष्टी खहाने के पश्चात ७ बजे के करीब शुरू हुई और रात ११.३० के करीब संपूर्ण हुई बिंन्दु सिंह के सफल संचालन के तहत गोष्टी का संचार हुआ.

Goyal ji, Devi N, meera Goyal, Sudha Om, Shashi Padha, Om ji सुधा ओम ढींगरा,  शशि पाधा,  केशव पाधा,  देवी नागरानी,  मीरा गोयल,  मदन गोयल, बिंन्दु सिंह,   आदिति  मजुमदार, रमेश शोणक,  तोषी शोणक, सरदार सिहं ,

Dr. Viajy, Shashi Padha, Sudhaji. Me

महिन्दर सिहं ,  उषा देव, जाफ़र अब्बास, विजया जी, फ़रहाना, श्री दास, श्रीमती दास. प्रो॰ बिजय दाश व उनकी धर्मपत्नी की भागीदारी रही.  अंत में सुधा जी ने सब का धन्यवाद अता किया.

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