शोर दिल में मचा नहीं होता

शोर दिल में मचा नहीं होता

गर उसे कुछ हुआ नहीं होता॰

काश! वो भी कभी बदल जाते

सोच में फासला नहीं होता॰

कुछ कशिश है ज़मीन में वर्ना

आसमाँ यूँ झुका नहीं होता

झूठ की बेसिबातियों की क़सम

सच के आगे खड़ा नहीं होता

अपना नुक्सान यूं न वो करता

तैश में आ गया नहीं होता

नज़रेआतिश न होती बस्ती यूं

गर मेरा दिल जला नहीं होता

दर्द देवीका जानता कैसे?

ग़म ने उसको छुआ नहीं होता

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3 टिप्पणियाँ

  1. tejwani girdhar said,

    मार्च 4, 2011 at 3:02 पूर्वाह्न

    लाजवाब पंक्तियां हैं ये-कुछ कशिश है ज़मीन में वर्ना, आसमाँ यूँ झुका नहीं होता, बहुत-बहुत साधुवाद

  2. R.M.TEWARI said,

    अप्रैल 26, 2011 at 12:37 अपराह्न

    Devi ji lekheni ka kamal aisa kyo hai,jaise kee maa ka ashirvad yo hai
    samajta hu aapke dil or dardo ko,ukera hai dukh dardo ko etni gahrai se

    Thank for lot
    R.M.TEWARI

  3. Devi nangrani said,

    मई 2, 2011 at 9:44 पूर्वाह्न

    Girdhar ji
    aapko mere ahsaas acche lage yeh aur baat hai par har dil ke jazbe kahain n kahain samanta zaroor rakhte hain. haan shabdavali roop badal badal kar aati hai
    sadhuwaad ke saath
    Devi Nangrani


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