Dauji Gupt in Mumbai

 

Goshti At Residence in Bandra

Ratna Jha, Dr. Rajam, Mehrish ji, Dauji Gupt, Devi Nangrani, Maya & Ram Govind. Shyam, Khanna, Alok Bhattacharya, Lakhbir. Shailendra kumar, Neeraj Goswamy,

प्रवासी साहित्यकारों के प्रतिनिधि डा॰ दाऊजी गुप्त मुंबई में

 सत्रह अप्रैल २०१० की बात है जब देवी नागरानी जी के मोबाइल फोन की घंटी बजी. ” मैं दाऊजी गुप्त बोल रहा हूँ लखनऊ से, कल मुंबई पहुंच रहा हूँ.” देवी जी ने क्षण भर को सोचा और ख़ुशी से बोलीं..” आपका स्वागत है हमारी महानगरी में. ” और बातों के सिलसिले में यह तय हुआ कि सुनने सुनाने के सिलसिले को एक काव्य गोष्टी के स्वरूप दिया जाय ताकि कुछ मिलने मिलाने का भी लाभ मिले” देवी जी जानतीं हैं के दाऊजी जो खुद बेहतरीन कवि हैं को कवितायेँ ग़ज़लें सुनने का कितना शौक है, लेकिन इतने कम समय में कौन आ पायेगा उनके यहाँ ये सोचनीय प्रश्न था. उन्होंने कहा ” दाऊजी आपका स्वागत है लेकिन मुझे ये सब प्रबंध करने में समय लगेगा आप अगर अनुमति दें तो ये काव्य गोष्ठी मंगल वार २० मंगलवार को रख लें.” इस तरह मंगल वार की शाम पांच बजे देवी नागरानी जी के घर पर एक काव्य गोष्ठी रखने का कार्यक्रम पक्का हो गया.

Dr. Sangeeta sahaj, Devmany Pandey, Dauji Gupt, Khanna ji, Alok B

जो लोग देवी जी को जानते हैं उन्हें उनकी कर्मठता और कार्य क्षमताओं का पूरा अंदाज़ा है, बहुत मुश्किल लगने वाले काम को वो आसानी से कर दिखाती हैं. एक बार वो जिस काम को करने का बीड़ा उठा लेती हैं उसके बाद उसे पूरा कर के ही सांस लेती हैं. अकेली होने के बावजूद वो कभी अपने आपको अकेला या असहाय नहीं पातीं. उनका ये गुण अनुकरणीय है. दाऊजी से बात करने के पश्चात उन्होंने बिना समय गंवाये मुंबई के काव्य रसिकों शायरों की एक लिस्ट तैयार की और फिर उसके अनुसार एक एक को फोन करने में जुट गयीं. तीन घंटे की लगातार हो रही फोन काल्स के बाद कई जाने माने शायर मंगलवार की शाम उनके घर पर पधारे.मंगलवार बीस अप्रेल को देवी जी घर सब से पहले पहुँचने वाले दाउजी गुप्त ही थे. पाँच बजे की तपती शाम में देवी जी के घर पहुँच कर दाउजी ने अपने काव्य प्रेम को दर्शा दिया. एक एक कर काव्य प्रेमी आने लगे. पिंगलाचार्य श्री महरिष जी, जानी मानी कव्यित्री माया गोविन्द और उनके अद्भुत शायर पति राम गोविन्द , हरदिल अज़ीज़ शायर जनाब खन्ना मुज्ज़फ़री, मधुर कविताओं के रचयिता कुमार शैलेन्द्र , ‘कुतुबनुमा’ 

 

Dauji Gupt, Mehrish DR. Lakhbir ka shawl Suman se sanmaan karte hue
पत्रिका के माध्यम से हिंदी की पताका फहराने वाली संपादक डा. राजम नटराजन पिल्ले, अपनी ग़ज़लों से सबके दिलों पर छाने वाले शायर जनाब सागर त्रिपाठी, सौम्य प्रकृति के अनूठे शायर जनाब हस्ती मल हस्ती, ‘क़ुतुबनुमा’ के संपादक मंडल और अनेकों संस्थाओं से जुड़े श्री अलोक भट्टाचार्य, नारी शक्ति की प्रतीक कव्यित्री नीलिमा दुबे, , प्रो॰रत्ना झा, खोपोली के शायर नीरज गोस्वामी, रास बिहारी पाण्डेय, आशु कवि श्यामकुमार श्याम,अपनी विशिष्ट शैली से चमत्कृत करने वाले कवि, शायर श्री लक्षमण दुबे ,आर. डी. नैशनल कालेज की हिंदी विभाग की अध्यक्षा डा॰ संगीता सहजवानी और जाने माने कवि, शायर, तथा मँच संचालक देव मणि पांडेय, जिन्होंने सहर्ष कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेवारी भी संभाली. शायर जनाब खन्ना मुज्ज़फ़री अध्यक्ष के पद पर आसीन हुए, श्री महरिष जी एवं दाऊजी गुप्त, माया गोविंद मुख्य महमान रहे.
गोष्टी के पूर्व देवमणि पांडेय ने श्री दाऊजी गुप्त का परिचय दिया और फिर गोष्टी में आए सभी कावियों का उनसे परिचय करवाया. दाऊजी गुप्त अंतराष्ट्रीय अखिल विश्व समिति के अध्यक्ष हैं और न्यूयार्क से प्रकाशित सौरभ पत्रिका के प्रधान संपादक भी .
शाम छः बजे से बहती हुई ये यादगार काव्य रस धारा सुनने सुनाने वालों को दो घंटों तक लगातार भिगौती रही. दो घंटे कब निकल गए पता ही नहीं चला . अन्तराल के पलों को देवमणि जी ने अपने कुशल संचालन से रोचक बना दिया.. सभी कवियों, कवित्रियों ने अपनी अपनी रचनात्मक अभिव्यक्तियों से समां बांधे रखा धन्यवाद ज्ञापन से पूर्व पिंगलाचार्य श्री महरिष जी ने श्री दाउजी गुप्त का सम्मान पुष्प गुच्छ और शाल ओढ़ा कर किया , इसके बाद देवी नागरानी जी ने
सुश्री माया गोविन्द जी का सम्मान पुष्प गुच्छ और शाल ओढा कर किया.
ये भी एक सुखद संजोग था की काव्य रसिक प्रो॰ लखबीर जी, जो राजम जी की शिष्य रह चुकी हैं ने उसी दिन अपना शोध कार्य पूरा कर डाक्टरेट की डिग्री हासिल की थी. श्री दाऊजी गुप्त ने सबकी ओर से उन्हें शुभकामनाओं के साथ पुष्प गुच्छ भेंट किये.
इस अभूतपूर्व काव्यगोष्ठी को सफल बनाने के लिए किये गए प्रयासों की सराहना करते हुए देवी जी ने सबका आभार प्रकट किया. कार्यक्रम के अंत में महमानों ने स्वादिष्ट व्यंजनों से सजे रात्रि भोज का आनंद लिया. ये काव्य गोष्ठी बरसों तक इसमें शामिल महमानों के दिलों में याद बनके महका करेगी
 प्रस्तुतकर्ताः नीरज गोस्वामी

 

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1 टिप्पणी

  1. दिसम्बर 14, 2011 at 4:48 अपराह्न

    Nice sharing thanks for the post. You have provided nice post I’ll bookmark your blog and read this kind of stuff very often. Keep updating it I will be following it.


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