बहारों का आया है मौसम सुहाना

गजलः 41

बहारों का आया है मौसम सुहाना
नये साज़ पर कोई छेड़ो तराना.

ये कलियां, ये गुंचे ये रंग और खुशबू
सदा ही महकता रहे आशियाना.

हवा का तरन्नुम बिखेरे है जादू
कोई गीत तुम भी सुनाओ पुराना.

चलो दोस्ती की नई रस्म डालें
हमें याद रखेगा सदियों जमाना.

खुशी बाँटने से बढ़ेगी ज़ियादा
नफ़े का है सौदा इसे मत गवाना.

मैं देवी खुदा से दुआ मांगती हूं
बचाना, मुझे चश्मे-बद से बचाना.

चराग़े-दिल/ ६७

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