तर्क कर के दोस्ती फिरता है क्यों?

ग़ज़लः ३७
तर्क कर के दोस्ती फिरता है क्यों
बनके आखिर अजनबी फिरता है क्यों?
चल वहां होगी जहां शामे-गज़ल
साथ लेकर बेदिली फिरता है क्यों?
बैठ आपस में चलो बातें करें
ओढ़ कर तू ख़ामुशी फिरता है क्यों?
जब नहीं दिल में खुशी तो किस लिये
लेके होटों पर हंसी फिरता है क्यों?
चाहतों के फूल, रिश्तों की महक
लेके ये दीवानगी फिरता है क्यों?
दाग़ दामन के ज़रा तू धो तो ले
इतनी लेकर गँदगी फिरता है क्यों?
है हकीकत से सभी का वास्ता
करके उससे बेरुख़ी फिरता है क्यों?
चराग़े-दिल/ ६३
Advertisements

4 टिप्पणियाँ

  1. Aliasgar said,

    अप्रैल 3, 2008 at 1:23 अपराह्न

    bohat he ache baat likhe hai
    दाग़ दामन के ज़रा तू धो तो ले
    इतनी लेकर गँदगी फिरता है क्यों?
    है हकीकत से सभी का वास्ता
    करके उससे बेरुख़ी फिरता है क्यों?
    bohat bohat sukriya

  2. अप्रैल 24, 2008 at 7:15 अपराह्न

    Aapko baat acchi lagi is ki khushi hai

    dhanyawaad ke saath
    Devi

  3. अगस्त 17, 2008 at 5:14 अपराह्न

    Mukesh ji
    aapka aabhar ise pasand karne ke liye

    Devi


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

  • Blog Stats

  • मेटा

  • %d bloggers like this: