करम ख़ुदा का है सब पर

ग़ज़लः ३२

ये सायबां है जहां, मुझको सर छुपाने दो

करम ख़ुदा का है सब पर, वो आज़माने दो.

जो दिल के तार छेड़े थे हमने बरसों से

उन्हें तो आज अभी छेड़ कर बजाने दो.

ख़फा न तुम हो किसी से भी देखकर कांटे

कि फूल कहता है जो कुछ, उसे बताने दो.

कभी तो दर्द भुलाकर भी मुस्कराओ तुम

दर्द के वो पुराने कभी बहाने दो.

ख़फ़ा हुई है खुशी इस क़दर भी क्यों हमसे

ग़मों का श् नेमुबारक हमें मनाने दो.

उदासियों को छुपाओ दिल में तुम देवी

कभी लबों को भी कुछ देर मुस्कराने दो.

चराग़ेदिल/ ५८

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7 टिप्पणियाँ

  1. मीत said,

    फ़रवरी 19, 2008 at 2:33 अपराह्न

    “एक मुद्दत हुई, न तुम से मिला था मैं भी
    आज कुछ तुम भी कहो, कुछ मुझे सुनाने दो”
    बहुत दिनों बाद आप की ग़ज़ल मिली पढने को. अच्छा लगा.

  2. mehhekk said,

    फ़रवरी 20, 2008 at 4:12 पूर्वाह्न

    कभी तो दर्द भुलाकर भी मुस्कराओ तुम

    न दर्द के वो पुराने कभी बहाने दो.

    ख़फ़ा हुई है खुशी इस क़दर भी क्यों हमसे

    ग़मों का जश् ने-मुबारक हमें मनाने दो.

    bahut khubsurat sher hai ,puri azal mein,gumo ke jashn manana bahut achha laga.
    aaj apki nayab si gazal padhkar mann prasanna ho gaya.there is always something inspirational in it.

  3. फ़रवरी 20, 2008 at 8:08 पूर्वाह्न

    आपकी तारीफ़ करने का मानी होगा, सूर्य को दीपक दिखाना, यह चेष्टा तो मैं कदापि नहीं कर सकता…

  4. मार्च 6, 2008 at 8:33 पूर्वाह्न

    Vinay ji

    aapka sneh sahitya se juda hua hai, isliye aapko achi lagi meri gazal. aapki tahedil se shukraguzaar hoon ise pasand karne ke liye,

    Devi

  5. मार्च 6, 2008 at 8:35 पूर्वाह्न

    Meet ji aapka sher apni jagah apne dil ki baat kah raha hai. kavita ek madhyam hai jo izhaar ki raah bunta jata hai.

    thanks
    Devi

  6. मार्च 6, 2008 at 8:36 पूर्वाह्न

    Mehek ji
    bahut dinon baad aapko likh rahi hoon. Hindustan ki vyastata ka kya kahna!!!
    wakt hi nahin deti aapse guftagoo karne ka.

    sorry but thanks

    with my best wishes
    Devi

  7. mehek said,

    मार्च 6, 2008 at 4:22 अपराह्न

    deviji hum samajh sakti hai aapki vyastata ko,aapne hume yaad kiya yahi bahut hai hamare liye,aap apni gazalon se hamse baatchit karti hai.har alfaz keh deta hai bhavana aur kuch naya sikhane milta hai harbar hame.shukran.


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