रूठा वो बे सबब न था मुझसे

ग़ज़लः ३०
जाने क्या कुछ हुई ख़ता मुझसे
रूठा वो बे सबब न था मुझसे.
जिसको हासिल न कुछ हुआ मुझसे
मौन का अर्थ पूछता मुझसे.
लोग क्या जाने जानने आए
नाता जिनका न था जुड़ा मुझसे.
जिसने रक्खा था कै़द में मुझको
खुद रिहाई था चाहता मुझसे.
ना-शनासों की बस्तियों में, कब
किसने रक्खा है राब्ता मुझसे.
सिलसिला राहतों का टूट गया
दिल की धड़कन हुई खफ़ा मुझसे.
चराग़े-दिल/ ५६
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4 टिप्पणियाँ

  1. paramjitbali said,

    दिसम्बर 26, 2007 at 5:59 अपराह्न

    बहुत बढिया!!

  2. दिसम्बर 26, 2007 at 8:13 अपराह्न

    लोग क्या जाने जानने आए
    नाता जिनका न था जुड़ा मुझसे.
    जिसने रक्खा था कै़द में मुझको
    खुद रिहाई था चाहता मुझसे.
    सिलसिला राहतों का टूट गया
    दिल की धड़कन हुई खफ़ा मुझसे….. bahut badiya sher 🙂
    Saadar
    hemjyotsana

  3. mehek said,

    दिसम्बर 27, 2007 at 1:31 पूर्वाह्न

    जिसने रक्खा था कै़द में मुझको
    खुद रिहाई था चाहता मुझसे.
    behad dil chunewali pankti hai.khubsurat gazal.

  4. दिसम्बर 27, 2007 at 8:26 अपराह्न

    mehek

    aapki bahut abhari hoon is protsahan bhari shabdavali ke liye.

    Devi


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