याद मुझे है अब तक

गजलः २८
वो अदा प्यार भरी याद मुझे है अब तक
बात बरसों की मगर कल की लगे है अब तक.
हम चमन में ही बसे थे वो महक पाने को
ख़ार नश्तर की तरह दिल में चुभे है अब तक.
जा चुका कब का ये दिल तोड़ के जाने वाला
आखों में अश्कों का इक दरिया बहे है अब तक.
आशियां जलके हुआ राख, ज़माना गुज़रा
और रह रह के धुआँ उसका उठे है अब तक.
क्या ख़बर वक्त ने कब घाव दिये थे ‘देवी’
वक्त गुज़रा है मगर खून बहे है अब तक.
चराग़े-दिल/ ५४
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6 टिप्पणियाँ

  1. paramjitbali said,

    दिसम्बर 22, 2007 at 6:44 पूर्वाह्न

    बहुत बढिया गजल है।

    जा चुका कब का ये दिल तोड़ के जाने वाला
    आखों में अश्कों का इक दरिया बहे है अब तक.

  2. neeraj said,

    दिसम्बर 22, 2007 at 6:59 पूर्वाह्न

    क्या बात है…वाह. हमेशा की तरह खूबसूरत रचना.शब्द ही कहाँ बचे हैं अब तारीफ के लिए.
    नीरज

  3. दिसम्बर 22, 2007 at 7:11 पूर्वाह्न

    bahut khoob 🙂
    Saadar
    hemjyotsana

  4. दिसम्बर 22, 2007 at 9:58 पूर्वाह्न

    क्या ख़बर वक्त ने कब घाव दिये थे ‘देवी’
    वक्त गुज़रा है मगर खून बहे है अब तक.
    ——————-
    हृदयस्पर्शी पंक्तियाँ
    दीपक भारतदीप

  5. mehhekk said,

    दिसम्बर 22, 2007 at 1:50 अपराह्न

    आशियां जलके हुआ राख, ज़माना गुज़रा
    और रह रह के धुआँ उसका उठे है अब तक.
    क्या ख़बर वक्त ने कब घाव दिये थे ‘देवी’
    वक्त गुज़रा है मगर खून बहे है अब तक.
    wah deviji,ye aakhri panktiya dil mein ek kasak chod gayi.

  6. दिसम्बर 24, 2007 at 8:55 अपराह्न

    वक्त गुज़रा है मगर खून बहे है अब तक.
    कया कहें, कया न कहें सोचते हैं ाब तक.

    नये सााल की शुभकामनाओं के साथ

    देवी नागरानी


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