तुझको अपना खुदा बनाया है

गजलः २३
तेरे क़दमों में मेरा सजदा है
तुझको अपना खुदा बनाया है.

जिसकीी ख़ातिर ख़ता हुई हमसे
वो ही इल्ज़ाम देने आया है.

ख़ुद की नज़रों से गिर गए हैं जो
हमने बढ़कर उन्हें उठाया है.

हौसला है बुलंद कुछ इतना
हमने तूफां में घर बनाया है.

हमको पूरा यकीन था जिसपर
तोड़कर उसने ही रुलाया है.

उसने धोका दिया हमें देवी
राज़े-दिल जिसको भी बताया है.
चराग़े-दिल/ ४९

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4 टिप्पणियाँ

  1. नवम्बर 11, 2007 at 5:33 अपराह्न

    उसने धोका दिया हमें देवी
    राज़े-दिल जिसको भी बताया है.
    —– बहुत सच और गहरी बात कह दी आपने…

  2. नवम्बर 11, 2007 at 5:52 अपराह्न

    aaderniye deviji
    जिसकी ख़ातिर ख़ता हुई हमसे
    वो ही इल्ज़ाम देने आया है…. bahut khoob
    हौसला है बुलंद कुछ इतना
    हमने तूफां में घर बनाया है….. 🙂
    हमको पूरा यकीन था जिसपर
    तोड़कर उसने ही रुलाया है……. bahut khoob
    puri ki puri ghazal shandaar hai

    saadar
    hem jyotsana

  3. mehhekk said,

    दिसम्बर 3, 2007 at 5:23 अपराह्न

    जिसकी ख़ातिर ख़ता हुई हमसे
    वो ही इल्ज़ाम देने आया है.

    badiya ek dam badiya lines hai ye

  4. दिसम्बर 9, 2007 at 11:48 अपराह्न

    mehhekk ji

    aapki tahe dil se abhari hoon jo meri site par aa kar un shabdon ko saraha.

    Shabd ke beej bo ke hum Devi
    Ashak se unko seenchte hi rahe

    wishes
    Devi


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