डर उसे फिर न रात का होगा

गजलः ८
डर उसे फिर न रात का होगा
जब ज़मीर उसका जागता होगा.

क़द्र वो जानता है खुशियों की
ग़म से रखता जो वास्ता होगा.

बात दिल की निगाह कह देगी
चुप जुबां गर रहे तो क्या होगा ?

क्या बताएगा स्वाद सुख का वो
ग़म का जिसको न ज़ायका होगा.

सुलह कैसे करें अंधेरों से
रौशनी से भी सामना होगा.

दूर साहिल से आ गए देवी
अब तो मौजों पे रास्ता होगा.

चराग़े-दिल /34

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3 टिप्पणियाँ

  1. सितम्बर 7, 2007 at 2:18 अपराह्न

    क्या बताएगा स्वाद सुख का वो
    ग़म का जिसको न ज़ायका होगा.

    -बहुत खूब कहा, देवी जी. दाद कबूलें.

  2. सितम्बर 7, 2007 at 3:34 अपराह्न

    Sammer ji
    daad tab loondi jub aap mujhe auron ki aur aapke blog par comments post karna sikha denge, vo bhi bina fees ke.
    ssneh

    Devi

  3. सितम्बर 7, 2007 at 6:48 अपराह्न

    Aadarniye Deviji ,
    hamesh ki tarf achi ghazal .
    Saadar
    hemjyotsana


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