एक काव्य गोष्टी तारीख 10 मई, गुरुवार 2012 श्रीमती देवी नगरानी के निवास स्थान पर शाम श्याम सखा जी के नाम, और शकुंतलाजी, और अनीता कपूर जी की उपस्थिती में सफलता से सम्पन्न हुई। सप्तरंगी शाम अपने साथ काव्य का छलकता हुआ जाम ले आयी और मौजूद कविगन को काव्य के हर रंग से ओतप्रोत करती रही। । इस गोष्टी में हरियाणा साहित्य अकादमी के निदेशक श्री श्याम सखा श्याम जी, रायपुर से श्रीमति शकुंतला तरार-संपादिका नारी का संबल, श्री नन्द किशोर नौटियाल जी,
महाराष्ट्र अकादेमी के पूर्व अध्यक्ष, जिनकी उपस्थिती ने शाम को और रंगमय बना दिया। शुरूवात जसराज पंडित जी के तेजस्वी शागिर्द कुमार नीरज ने करके गोष्टी का आगाज किया, केन्द्रीय हिन्दी प्रशिक्षण से सहायक निदेशक श्री अनंत श्रीमली जी ने संचालन का भर संभाला, जो खुद एक बहतरीन हास्य व्यंग्य कवि/मंच संचालक एवं सहायक निर्देशक, भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग में कार्यरथ हैं। उपस्थित माननीय कवि गण में श्री आर. पी. शर्मा, ग़ज़ल के पिंगलाचार्य थे जिनकी नवनीतन संग्रह “ग़ज़ल सृजन” का विमोचन किया श्री श्याम सखा और नन्द किशोर नौटियाल जी की उपस्थिती में हुआ। मौजूद महमानों में रहे श्री आर. पी. शर्मा जी के सुपुत्र श्री रमाकांत शर्मा , संगीता सहजवाणी, मेघा श्रीमाली, श्रुति संवाद के अध्यक्ष श्री अरविंद राही, संयोग साहित्य के संपादक श्री मुरलीधर पांडेय, कुतुबनुमा की
संपादिका श्रीमती राजम नटराजम, चित्रकार नईमा इम्तियाज़,
जिसने ऐन मौके पर देवी जी को अपनी एक पेंटिंग भेंट की। और शामिल गण थे खन्ना मुजफ्फरपुरी , डॉ बनमाली चतुर्वेदी, सुमन जैन जी, डॉ लछमन शर्मा, सतीश शुक्ल जी, नीरज गोस्वामी, नवीन चतुर्वेदी, मुंबई की वरिष्ठ रचनाकार पुष्पा राव, रत्ना झा, , लखबीर वर्मा जी उपस्थित थे। 5 घंटों तक चली इस काव्य-गोष्टी में उपस्थित गुनिजनों ने एक से एक बढ़िया गजल और कवितायें सुना कर काव्यमयी शाम को एक यादगार शाम बना दिया। अंत में नागरानी जी ने सभी महमानों का आभार प्रकट किया, शाम जलपान से सम्पन्न हुई।
सप्तरंगी शाम -श्याम सखा जी के नाम,
मई 16, 2012 at 7:12 पूर्वाह्न (समाचार)
श्री आर॰ पी॰ शर्मा “महरिष” की पुस्तक “ग़ज़ल-सृजन”
मई 2, 2012 at 8:42 पूर्वाह्न (समाचार)
आर॰ पी॰ शर्मा ‘महरिष’ ग़ज़ल के क्षेत्र में एक जाना पहचाना नाम है।
उन्होने ग़ज़ल लेखन का मार्ग सुगम और प्रशस्त करने के लिए ग़ज़ल, बहर और पर कई उपयोगी पुस्तकें लिखीं हैं। इस श्रंखला में “ग़ज़ल-सृजन” उनकी नवनीतम पेशकश है, इसमें ग़ज़ल के बाहरी और आंतरिक स्वरूप, काफिया, रदीफ़, कथ्य एवं शिल्प तथा ग़ज़ल की अन्य बारीकियों की विस्तार से चर्चा की गई है, तथा पर्याप्त संख्या में प्रचलित बहरों के अंतर्गत तख़्ती के उदाहरण दिये गए हैं। इसकी अतिरिक्त इस पुस्तक में अन्य काव्य विधाओ, रुबाई, हाइकु रुबाई, महिया, महिया ग़ज़ल, तज़मीन, दोहा, जनक छंद तथा ग़ज़लों के लिए उपयुक्त छंदों और ग़ज़ल से संबंदित अन्य सुरुचिपूर्ण सामाग्री का भी समावेश है….इस संग्रह को हासिल करने के लिए संपर्क करें
- श्री आर॰ पी॰ शर्मा , Flat. 402, Plot 11 A, Shri Ramniwas Society, Peston Sagar Road, No:3, Ghatkopar Mahul Road, Chembur, Mumai 400089. Phone: 9321545179
- देवी नागरानी : 9-D, Corner View Society, 15/33 Road, Bandra, Mumbai 400050. Ph: 9987928358, dnangrani@gmail.com
- मुरलीलीधर पाण्डेय, संपादक: संयोग साहित्य ,
204/A, Chintamani, RNP Park,(opp Kashinath Temple), Bhayander(E), Mumbai 401105 , Ph: 9920311683, Res: 022-28151737
- USA: Anoop Bhargav : “Anoop Bhargava” anoop_bhargava@yahoo.com
- Canada: Sameerlal : Sameer Lal sameer.lal@gmail.com
- (Price Rs. 150/ $ 5)
26 january 2012 Gantantra Diwas
फ़रवरी 28, 2012 at 11:42 पूर्वाह्न (समाचार)
National Seminar in Delhi
फ़रवरी 28, 2012 at 11:20 पूर्वाह्न (समाचार)
National Seminar on The Women writers in Sindhi Literaure ON 19,20 November 2011 in Delhi
Chied Guest: Smt Sheela Dixit, Khas Mehmaan Prof: KIran Walia, Padmashri Shanti Hiranandani
Ahyaks: Shri Murlidhar jetley All on Stage
द्वि-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद
फ़रवरी 7, 2012 at 7:21 अपराह्न (समाचार)
महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी के सहयोग से एसआयईएस कॉलेज के हिन्दी विभाग एवं कथा यू.के.(लन्दन) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित द्वि-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद २७-२८ जनवरी २०१२ प्रवासी हिंदी साहित्य:उपलब्धियां और अपेक्षाएं
प्रवासी साहित्य की आलोचना का नया मापदंड विकसित किया जाय महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी के सहयोग से एसआयईएस कॉलेज के हिन्दी विभाग एवं कथा यू.के. लन्दन के संयुक्त तत्वावधान में प्रवासी हिन्दी साहित्य उपलब्धियां और अपेक्षाएं विषय पर आयोजित द्वि-दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय परिसंवाद में प्रवासी लेखकों ने कहा कि उनके साहित्य की आलोचना परंपरागत मापदंडों से नहीं की जा सकती.
एसएनडीटी महिला विद्यापीठ की पूर्व कुलगुरु डॉ. चंद्रा कृष्णमूर्ति की अध्यक्षता में महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी के कार्याध्यक्ष डा. दामोदर खडसे ने परिसंवाद का उद्घाटन करते हुए कहा कि प्रवासी साहित्यकारों ने विश्व स्तर पर हिन्दी भाषा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. विशेष अतिथि के रूप में लन्दन (यू.के.) से पधारी कथाकार जकिया जुबैरी ने कहा कि आलोचक हमें बताएं कि उनकी प्रवासी साहित्य से क्या अपेक्षाएं है. मुख्य अतिथि डॉ. असगर वजाहत ने बीज वक्तव्य में कहा कि प्रवासी लेखन ने विगत दो दशकों में अपनी विशिष्ट पहचान बना ली है. उसे किसी से अपनी जगह पूछने कि जरूरत नहीं है. उन्होंने जोर दिया कि प्रवासी साहित्य के दायरे में पाकिस्तान और बंगलादेश को भी शामिल किया जाना चाहिए. परिसंवाद के आरम्भ में प्राचार्या डॉ.हर्षा मेहता ने महाविद्यालय एवं हिन्दी विभाग द्वारा किये जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की चर्चा करते हुए अतिथियों का स्वागत किया. हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ.संजीव दुबे ने परिसंवाद की प्रस्तावना प्रस्तुत की.
विषय प्रवर्तन करते हुए प्रसिद्ध कथाकार और कथा यू.के. के महासचिव तेजेन्द्र शर्मा ने कहा कि परंपरागत आलोचना प्रवासी साहित्य के साथ पूरा न्याय नहीं कर सकती. अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद के प्रवासी साहित्य की अवधारणा पर केंद्रित प्रथम सत्र में डॉ.रामजी तिवारी(पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष,मुंबई विश्वविद्यालय), डॉ.श्याम मनोहर पाण्डेय (पूर्व प्रोफ़ेसर,ओरिएंटल विश्वविद्यालय), श्री सुंदरचंद ठाकुर (सम्पादक,नवभारत टाइम्स) ने महत्वपूर्ण विचार रखे. प्रवासी लेखकों में सुश्री जकिया जुबैरी(यू.के.), श्री तेजंद्र शर्मा(यू.के.), श्रीमती नीना पॉल (यू.के.), श्रीमती देवी नागरानी (यू.एस.ए.),डॉ.अनीता कपूर(यू.एस.ए.),श्रीमती अंजना संधीर(यू.एस.ए.) एवं श्री उमेश अग्निहोत्री (यू.एस.ए.) श्रीमती स्नेह ठाकुर (कनाडा) ने प्रवासी साहित्य के विविध पक्षों पर महत्वपूर्ण वक्तव्य दिए.
प्रवासी साहित्य पर अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद के पहले दिन कि शाम प्रवासी कवि सम्मेलन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कारण यादगार बन गयी. श्री देवमणि पाण्डेय के संचालन में सुश्री जकिया जुबैरी (यू.के.), श्री तेजंद्र शर्मा (यू.के.), श्रीमती नीना पॉल (यू.के.), श्रीमती देवी नागरानी (यू.एस.ए.), डॉ. अंजना संधीर (यू.एस.ए.) एवं श्रीमती स्नेह ठाकुर (कनाडा) ने अपनी ताजी कविताओं का पाठ किया. महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने रंगारंग नृत्य-गीत प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया. प्रवासी साहित्य कि अवधारणा, प्रवासी हिन्दी कविता, प्रवासी हिन्दी कहानी, प्रवासी हिन्दी उपन्यास तथा विविध विधाओं में लिखे जा रहे प्रवासी साहित्य पर केंद्रित विभिन्न सत्रों में कथाकार श्रीमती सूर्यबाला, श्रीमती सुधा अरोड़ा, डॉ.हरियश राय, डॉ.एम.विमला (बंगलोर), डॉ.शांति नायर(केरल) डॉ.विजय शर्मा(जमशेदपुर) डॉ.लालित्य ललित (दिल्ली) ने अपने विचार रखे. डॉ. सुमन जैन, डॉ. सतीश पाण्डेय, डॉ.एस.पी.दुबे, डॉ. अनिल सिंह, डॉ.शशि मिश्रा, डॉ.उषा राणावत, डॉ.उषा मिश्रा, श्रीमती मधु अरोड़ा, श्रीमती रेखा शर्मा, सुश्री अजंता शर्मा (दिल्ली) डॉ. मिथिलेश शर्मा, श्री दिनेश पाठक, डॉ.मनीष मिश्रा, डॉ.अशोक मरडे, डॉ.संदीप रणभिरकर, सुश्री गीता सिंह, श्री एस.एन.रावल, डॉ.श्यामसुन्दर पाण्डेय, डॉ.जयश्री सिंह, श्रीमती तबस्सुम खान अनेक प्रवासी रचनाकारों के अवदान पर केंद्रित प्रपत्र प्रस्तुत किये. इन प्रपत्रों में उषा प्रियम्वदा, सुषम बेदी, जकिया जुबैरी, तेजेन्द्र शर्मा, सुधा ओम ढींगरा, सुदर्शन सुनेजा, रेखा मैत्र, जय वर्मा, नीना पॉल, दिव्या माथुर, उषा राजे सक्सेना, पुष्प सक्सेना, उमेश अग्निहोत्री, अर्चना पैन्यूली आदि प्रवासी साहित्यकारों के अवदान पर चर्चा की गयी. उक्त प्रपत्रों के अतिरिक्त प्रवासी साहित्य की विभिन्न प्रवृत्तियों पर भी वक्ताओं ने अपने विचार रखे. परिसंवाद में मुंबई के प्रतिष्ठित रचनाकारों, समीक्षकों, पत्रकारों एवं प्राध्यापकों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही. “प्रपत्र वाचक” खास बधाई के पात्र हैं, क्योंकि उन्होनें कठिन प्रयासों से प्रवासी लेखन को पढ़ा, चिंतन-मनन करके अपने चुनाव के प्रवासी भारतीय रचनाकार के बारे में डूबकर उनके काव्य, कहानी, उपन्यास की कड़ियाँ जोड़कर, अपने प्रपत्र को सोच और शब्दों में बुनकर बहुत ही स्रजनात्मक ढंग से अपने-अपने विषयों पर रौशनी डाली। यह अपने आप में एक उपलब्धि है। समार्पन सत्र की अध्यक्षता की SIES कॉलेज की प्राचार्या डॉ॰ हर्षा मेहता ने, विशेष अतिथि रहे डॉ॰ लालित्य ललित( संपादक, नैशनल बूक ट्रस्ट, नयी दिल्ली) । अंत में इस अधिवेशन के संयोजक एवं हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ॰ संजीव दुबे जी ने सभी विशेष महमानों, वरिष्ठ साहित्यकारीं का आभार प्रकट किया। SIES कालेज और कथा UK के सफल प्रयासों के लिए प्राचार्या डॉ॰ हर्षा मेहता जी, इस अधिवेशन के संयोजक एवं हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ॰ संजीव दुबे जी, UK कथाकार के सचीव श्री तेजेंद्र शर्मा जी, परिसंवाद के आयोजन में डॉ. उमा शंकर, प्रो.रजनी माथुर, प्रो.लक्ष्मी, प्रो.कमला, प्रो. सुचित्रा, प्रो. सीमा, प्रो.शमा, प्रो.वृशाली ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई. और कालेज के तमाम स्टाफ को मेरी ओर से दिली बधाई व शुभकामनायें। जयहिंद ! देवी नागरानी
डॉ॰ श्याम सखा ‘श्याम’ के नाम
जनवरी 9, 2012 at 3:05 पूर्वाह्न (समाचार)
जनवरी 5, गुरुवार, 2012, संयोग साहित्य द्वारा आयोजित “एक शाम श्याम डॉ॰ श्याम सखा ‘श्याम’ के नाम” का आयोजन किया जिसमें रोहतक (हरियाणा) से पधारे हरियाणा साहित्य अकादमी के निर्देशक डॉ॰ श्याम सखा ‘श्याम’ जी, का सन्मान हुआ। गोष्टी मुंबई निवासी श्रीमती शैलजा व श्री नरहरी जी के निवास स्थान पर छंद शास्त्र के पिंगलाचार्य श्री आर. पी. शर्मा जी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस गोष्टी के संयोजक संयोग साहित्य के प्रधान संपादक श्री मुरलीधर पांडेय की देख-रेख में शाम 5.30 बजे से रात 10.00 तक चलती रही। संचालक का भार वरिष्ठ विधवान साहित्यकार डॉ॰ बनमाली चतुर्वेदी जी ने सशक्तता से संभाला। महफिल का आगाज नीरज कुमार जी ने अपनी मधुर आवाज़ में सरस्वती वंदना से किया और फिर श्री श्याम सखा ‘श्याम’ जी की रचनाओं की भीनी भीनी बारिश में श्रोता भीगते रहे, सुनते रहे, अनोखे मुक्तक, गीत, ग़ज़ल। श्याम सखा जी ने बेहद अनूठे शेरों को भावविभोर होकर सुनाया और महफिल में वाह वाह लूटी। आप भी सुनें उनकी इस उड़ान की रफ़्तारी …
उनकी बातें ही झिडिकियों की तरह/ जख्म मेरे खुले खिड़कियों की तरह
घूमना है बुरा तितिलियों की तरह /घर में बैठा करो लड़कियों की तरह
हेमाचन्दानी, खन्ना मुज़फ्फ़रपुरी, मुरलीधर पांडेय, श्री आर. पी. शर्मा, डॉ॰ श्याम सखा ‘श्याम’ , डॉ॰ बनमाली चतुर्वेदी, शैलजा नरहरी, देवी नागरानी, नेहा वैध, श्री मा.ना. नरहरी, डॉ॰ संतोष श्रीवास्तव, सुमीता केशवा
संयोग साहित्य के संपादक श्री मुरलीधर पाण्डेय ने तरनुम में एक गीत गाया…..
कोई पूछता है, कोई ढूँढता है
कहाँ ज़िंदगी है, किधर ज़िंदगी है
श्री आर. पी. शर्मा जी के सुपुत्र रमाकांत शर्मा ने अपने कहानी संग्रह नया लिहाफ से एक कहानी ‘आखिर वे आ गए’ पढ़ी जिसका मर्मस्पर्शी मंज़र सुनने वाले श्रोताओं को भावविभोर कर गया । अब बारी आई श्री मा.ना. नरहरी जी की जिन्होने अपनी ग़ज़लों से लोन का मन मोह लिया।
रौशन चरागों को दुपते से बुझाया न करो
फूलों भरी शाखों को यूं हिलाया न करो
कैसे कह दूँ तू मेरा है / गैरों से तेरा रिश्ता है। और सिसिलेवार अनेक शेर भी पेश किए …
श्रीमती शैलजा नरहरी ने मंत्र मुग्ध करती हुई शैली और आवाज़ में अपनी दो ग़ज़ल और कुछ मुक्तक पेश किए…..
अपने भीतर उतार के देख लिया
पारा पारा बिखरके देख लिए
Photo 3049
देवी नागरानी ने चंद दोहे और एक ग़ज़ल के साथ अपना कलाम पूरा किया
अनबुझी प्यास रूह की है ग़ज़ल
खुश्क होंटों की तिशनगी है ग़ज़ल
अब नरहरी जी संचालक महोदय श्री बनमाली जी को आवाज़ दे रहे हैं, तो आइये उन्हें सुनते हैं…
भूखे से सौ गुने खिलाने वाले भूखे
प्यासों से सौ गुने यहाँ के पनघट प्यासे हैं
वाह वाह ! जाने अनजाने सभी के मुख से वाह वाह फिज़ाओं में फैल गयी॰
अब मंच पर अपना रंग जमाने आए है खन्ना मुज़फ्फ़रपुरी, सुनिए…
बाग-बगीचे, हसना गाना
फूल या तितली सब अफ़साना
सशक्त कहनीकार, उपन्यासकार डॉ॰ संतोष श्रीवास्तव ने एक मधुर अनुपम गीत सुनाया….
तेरे इश्क़ ने किया है असर हौले-हौले
सुमीता केशवा ने इस गीत पर खूब दाद पायी ……
ऐसी कोई बात न हो जिसमें तेरा साथ न हो/
उभरती हुई नई रचनकर, पर पुरानी कलाकार हेमाचन्दानी ने सुरमई ग़ज़ल से एक मदहोशी वातावरण में घोल दी …
लम्हा दर लम्हा यूं रिश्तों की दरकते देखा
चंद चाँदी के झरोखों में सिसकते देखा
नेहा वैध ने अपने मधुर कंठ में एक गीत पेश किया…..
धार कुछ और धारे छोड़ने होंगे
गीत सुंदर सुरों में पिरोकर पेश किया।
कवियित्रि पूजा दीक्षित ने उस दौर और इस दौर के बचपन के बीच की रेखाएँ लांघती रही
अंत की ओए आते आते श्री आर. पी. शर्मा जी ने अध्यक्षता पद की मर्यादा के अनुसार अंत में अपनी तीन ग़ज़ल पढ़ी, जिसमें से एक का मिसरा रहा ….
धूप तन मन को सुहाए तो ग़ज़ल होती है
और शीत में शाल ओढ़ाए तो ग़ज़ल होती है।
सलीकेदार श्रोताओं में रही श्रीमती अंजु (डॉ॰ रामकांत जी की पत्नि, और श्री खन्ना मुज़फ्फ़रपुरी की पत्नि श्रीमति कृष्णा जी-। डॉ॰ राजेंद्र यादव जी का क्या परिचय दूँ, एक स्वस्थ, सही, मौन श्रोता बनकर हर एक पहलू से सनमानित हस्ताक्षरों की तस्वीरें खींचते रहे। उन्हें कैमेरा में क़ैद करते रहे, करते रहे….जो मौके को एक यादगार दे गए। अंत में श्री नरहरी श्री शयम सहा जी का, महरिश जी का और सभी उपस्थित कविगन का आभार प्रकट किया और सुरीली श्याम चाय नाश्ते के साथ संपन्न हुई
देवी नागरानी
जिंदगी की नाव चले
जनवरी 6, 2012 at 7:05 पूर्वाह्न (समाचार)
ज़िंदगी की नाव को इस पार से उस पार तक ले जाने वाले गीतकार शैलेंद्र कुमार नहीं रहे “उनका हमारे बीच होना न होना उस एक पल ने तय किया, जो चोरों की मानिंद रात को घर में घुस आया, “ बुधवार 21, दिसंबर 2011, सुबह-सुबह खन्ना मुज़फ्फ़रपुरी ने यह मनहूस ख़बर दी–“हमारे परम मित्र शैलेन्द्रजी नहीं रहे।“ अचानक ही हमारे बीच से, हमारे हाथों से वह ज़िंदगी खुद को रिहा कर गयी….जी हाँ! स्वर्गीय श्री जीवतराम सेतपाल जी के साहित्य का एक अंश “आँखों के आईने से” आज भी सजीव होकर आँखों के सामने रक्स कर रहा है,: “वह जा रही है, बहुत दूर जा चुकी है, कमबख़्त ने एक बार भी मुड़कर नहीं देखा और मैं उसे दूर से, दूर तक जाता हुआ देखती रहा । वह धीरे-धीरे एक छोटे से धुंधले आकार में बदल गयी और मेरा दिल उसके साथ ही लटकता चला गया।“ इसी माह की 10 तारीख़, शनिवार , 2011 के दिन, कालीना यूनिवरसिटी के भव्य भवन में एक ग़ज़ल-गोष्टी में मैंने उन्हें आख़िरी बार ग़ज़ल पाठ करते हुए सुना और वह यही मिसरा है जो मुझे याद आता है: “कहता है हक़ीक़त आईना, मानिए” ग़ज़ल सुनाते हुए तालियों के बीच वो सुनाते रहे, सभी सुनते रहे, और मैं सोचती रही कि उस छोटे बहर की ग़ज़ल में उन्होने कितनी बड़ी सचाई का बयान किया है, अजीब संदर्भ है जीवन की गाड़ी के संदर्भ में कितना सच है, जो यकायक चलते चलते रुक जाती है। रेत पे लिखा / शब्दों का संसार / बेनिशां हुआ वहीं उस महफिल में मौजूद उर्दू के वरिष्ठ शायर ताज़दार साहब का एक शेर जो दिल को सहलाता रहा कुछ इस तरह रहा: किस हिमाक़त से किनारे पे उछाला हमको देखली हमने समंदर की भी औक़ात मियां शैलेन्द्र जी के लिखे अनेक गीत लोगों की ज़बान पर छिड़े रहते है, वे किसी भी महफिल में हों, आवाज़ें उठती है, “जिंदगी की नाव चले” तरन्नुम में गायें ; यह उनका ही नहीं हम सभी मुंबई वालों का पसंद-दीदा गीत रहा, कितना अच्छा लगता रहा उसे सुनते हुए, जैसे कोई पानी की लहरों पर शब्दों को सहला रहा हो। किसी शायर ने सच कहा है— मैं थोड़ी देर जिसपे सर रखकर बैठता हूँ वो पत्थर की नहीं, उम्मीदों की दीवार है कोई रिश्तों सारी उम्मीदें यहीं आकर ख़त्म हो जाती है, मन मायूसी से घिर आता है, खामुशी हैरान है इस पल और उस पल के बीच के फासले पर… सामने आज के, उसका भी कभी कल होगा है अभी साथ जो अंतिम वो, कभी पल होगा क्या कभी चूक सका उसका निशाना ‘देवी’ मौत से बचके निकलना तो कोई छल होगा। पर दिल अभी मानता ही नहीं—महस्सोस करते हुए कह उठता हैतुम्हारे हर कदम की आहट मैं महसूस करती हूँ। वो टूटे दिल की झनकार भी मेरे दिल की पगडंडी से गुज़र कर जाती है। देवी नागरानी
श्री विनय मिश्र जी के सन्मान में
नवम्बर 5, 2011 at 3:13 पूर्वाह्न (समाचार)
दिनांक २८, अक्टूबर २०११, मुंबई, बांद्रा में श्रीमती देवी नागरानी के निवास स्थान पर दिल्ली से पधारे प्रख़्यात लेखक श्री विनय मिश्र के सन्मान में एक गोष्टी का आयोजन हुआ जिसमें शाम को सुरमई बनाने में शिरकत करने वालों में शायर जनाब खन्ना मुज़्ज़फ़रपुरी अध्यक्ष के पद पर आसीन हुए, श्री विनय मिश्र मुख्य महमान रहे, डा. राजम नटराजन पिल्लैः संपादक कुतुबनुमा, मुरलीधर पांडेयः संपादक संयोग सहित्य, श्री नीरज कुमार, प्रो॰रत्ना झा, आर. डी. नैशनल कालेज की हिंदी विभाग की अध्यक्षा डा॰ संगीता सहजवानी. ग़ज़लकार शिवदत अक्स, व सुप्रिया जाधव. संचालन का भार संभाला प्रो॰ रत्ना झा ने संभाला.
सुरमई शाम का आगाज़ मधुर कंठ से नीरज कुमार ने ” वीणा वादिनी वर दे” सरस्वती वंदना से किया. तस्वीर में नीरज जी गाते हुए. शिवदत जी ने दो ग़ज़लें गाई, सुप्रिया ने लताजी की एक ग़ज़ल ” यूँ हसरतों के दाग़ मुहब्बत में धो लिये” प्रस्तुत की. मुरलीधर जी ने क्लासिकल धुनों में सजाई अपनी दो ग़ज़लें पेश की और सभी की फरमाइश पर एक गीत भी गाया. डा॰ राजम जी ने “तुम्हारा अपना नाम क्या है गांधारी?” एक मुसलसल सिलसिलेवार कविता पढ़कर अपनी दक्षता का सिक्का जमाया. डा॰ संगीता ने भी सामाजिक सरोकारों, भ्रष्टाचारों को शब्दों में बुनकर सच के सामने एक आइना पेश किया. देवी नागरानी ने अपनी ग़ज़लें पेश की जिस में से एक का मतले रहाः
कुछ न कहकर भी सब कहा मुझसे
जाने क्या था उसे गिला मुझसे
रत्ना झा ने पहली बार अपनी रचना ” तुम अच्छा बोतले हो” का पाठ किया तो मंचासीन वाह वाह कहे बिना न रह पाये. आगाज़ के अंत की ओर आते बेताबियां बढ़ी और श्री विनय मिश्रा जी ने समां बांधते हुए दोहे व दोहा ग़ज़ल से सभी का मन मोह लिया.
क्या पूजा क्या बंदगी क्या सजदे, अरदास
सब से ऊंची साधना, बचा रहे अहसास
खन्ना जी ने अध्यक्षता के शब्दों के साथ साथ अपने नये तेवरों से हास्य व व्यंग पर अपनी नई रचनाएं सुनाई और अपने पद को अंजाम तक ले आए.
शब्द के पुष्प जो पिरोते हैं
वो बड़े ख़ुशनसीब होते हैं
सभी रचनाकार अपनी रचनाओं से एक समाँ बांधने में सक्षम रहे. इस मधुरतम वातावरण में देवी जी ने विनय मिश्रा जी का शाल से सन्मान किया.
काव्य गोष्टी सफलता पूरक संपूर्ण हुई. देवी नागरानी ने सभी कविगण का तहे दिल से आभार व्यक्त किया. मधुर वातावरण में जलपान के साथ शाम ढली. जयहिंद
देवी नागरानी
एक मौन साधक-राजीव सारस्वत
अगस्त 22, 2011 at 7:35 अपराह्न (समाचार)
एक मौन साधक..राजीव सारस्वत
जलकर चराग़ दिल का ज़रा देर बुझ गया
झोंका हवा का यूँ भी अभी दे गया दग़ा
मुंबई की स्याह रातों के अंधियारे में खो गए इस मुल्क के जवां अपने ही भाई, बेटे उन ज़ुल्मतों की चौखट पर, जहाँ नफ़रतों का ज़हर धाँय धाँय करता हुआ इस मायावी नगरी को अपने अगोश में भर रहा था, २६ नवंबर ….उफ़ !!
राजीव सारस्वत के आकस्मिक निधन से जितना सदमा उनके परिवार व उनके सहयोगियों, जानने पहचनाने वालों को हुआ है, उसकी भरपाई कर पाना नामुमकिन है. उस गहरे दुःख के समय में उनकी यादों के अनगिनत सिलसिले याद आते हैं| श्रुतिसंवाद कला अकादमी के बहुभाषी कवि सम्मेलन में उनसे पहली मुलाकात हुई, उनके संचालन क्षमता की साक्षी रही और एक अनुपम छवि मन में घर कर गई. उनका व्यक्तित्व देखकर मन मुग्ध सा हुआ, सादगी व सरलता स्वभाव में कूट कूट कर भरी हुई हो जैसे, एक मौन साधक जो साहित्य के माध्यम से जोड़ने की कला का परिचय दिया करता था. एक जागरूक कवि होने के नाते राजीव प्राय: सामयिक विषयों पर लिखते रहते थे, 10 अक्तूबर को श्रुतिसंवाद कला अकादमी के कवि सम्मेलन में उन्होंने एक कविता सुनाई थी, जिसकी पंक्तियाँ आने वाले कल की मार्गदर्शक है….
नए दौर को अब नया व्याकरण दें
विच्छेद को संधि का आचरण दें.
राजीव सारस्वत याद बनकर दिलों में बसर करेगा. मुस्कराता हुआ मासूम सा चेहरा भूल नहीं पाएंगे, मौत के सौदागर साज़िशों से अपनेपन का यकीन लूटते हैं, जिसकी कीमत कोई और चुका रहा है….
ज़िंदगी के आइने में मौत की तस्वीर देखी
अपनी लाचारी पे रोती आज हर तदबीर देखी
मौन से अश्रू श्रधांजली अर्पित करते है उस मौन साधक को जो याद बनकर कर हमारे दिलों में सदा रहेगा. जयहिंद
देवी नागरानी
Flaf Hoisting In Jesrsey City
अगस्त 19, 2011 at 2:32 अपराह्न (समाचार)














