गजलः 41
बहारों का आया है मौसम सुहाना
नये साज़ पर कोई छेड़ो तराना.
ये कलियां, ये गुंचे ये रंग और खुशबू
सदा ही महकता रहे आशियाना.
हवा का तरन्नुम बिखेरे है जादू
कोई गीत तुम भी सुनाओ पुराना.
चलो दोस्ती की नई रस्म डालें
हमें याद रखेगा सदियों जमाना.
सदा ही महकता रहे आशियाना.
कोई गीत तुम भी सुनाओ पुराना.
हमें याद रखेगा सदियों जमाना.



