August 17, 2008 at 5:25 pm (समाचार)
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“कुतुबनुमा” का तीसरे अंक का लोकार्पण एवं काव्य गोष्टी संपन्न
आयोजित काव्य गोष्टी रविवार दिनांक १० अगस्त २००८ को श्रीमती देवी नागरानी जी के निवास स्थान, बांद्रा पर वरिष्ट ग़ज़लकार श्री मा.ना. नरहरी, की अध्यक्षता तथा श्री अनंत श्रीमाली जी के कुशल संचालन के साथ संपन्न हुई.
अभिव्यक्ति की आज़ादी की पैरोकार त्रेमासिक पत्रिका “कुतुबनुमा”. के तीसरे अंक, जून-अगस्त २००८, में अपने श्रेष्ट संपादन का सिक्का जमाया है डा॰ राजम नटराजन पिल्लै जी ने जिनका परिचय देना सूरज को उंगली दिखाने के समान है. उनका संपादन ही उनका परिचय है और पहचान भी है. विशेष रूप से राजम जी ने बरलिन से आई साहित्यकारा सुशीला शर्मा जी, नरहरि जी का स्वागत फूलों से किया और देवी नागरानी ने मुंबई की वरिष्ट ग़ज़लकारा मरियम ग़ज़ाला का सन्मान फूल व शाल के साथ किया. पत्रिका का लोकार्पण साहित्यकारा सुशीला शर्मा जी ने किया जिसके साथ उपस्थित रहीं डा॰ राजम, श्री मा.ना. नरहरी, देवी नागरानी, और अनंत श्रीमाली.
+चित्र में दाये से बायें सुशिला शर्मा, देवी नागरानी, राजम पिलै, अनंत श्रीमाली, श्री मा.ना. नरहरी, श्री अक्षय जैन
इस गोष्टी में पधारे मुंबई के अनेक शाइर व रचनाकार, मुख्य महमान रहे “दाल रोटी” के प्रधान संपादक श्री अक्षय जैन जिनकी पुस्तक ” आगे और लड़ाई है” का विमोचन डा॰ राजम नटराजन के हाथों संपन्न हुआ. गोष्टी में अपनी रचनाओं का पाठ करते हुए एक सप्तरंगी श्रिंगार से सजी माला पेश हुई जिसमें पिरोये गए थे मुक्तक, दोहे, गीत, ग़ज़ल और लघुकथा. संवाद करने के लिये भाषा का विस्तार जो हर सीमा को तोड़ता हुआ आगे बढ़ रहा है उसको सुसजित किया शामिल रचनाकार कुमार शैलेन्द्र जी, खन्ना मुज़फ्फ़रपुरी, मुरलीधर पाण्डेय, रमेश श्रीवास्तव, मरियम ग़ज़ला, देवमणी पांडेय, अरविंद शर्मा “राही” , रामप्यारे रघुवंशी, अक्षय जैन, संजीव निगम, संगीता सहजवाणी, शिवदत “अक्स”, रेखा “रौशनी”, कुलवंत सिंह, रवींद्र प्रकाश हंस, रज़ा साहब, ताज वारसी साहब, रत्ना झा और मेघा श्रीमाली ने
डा॰ राजम जी को इस दिशा सूचक “कुतुबनुमा” के लिये अपनी दिली मुबारकबाद और शुभकामनायें प्रेषित करते हुए देवी नागरानी जी सभी आए हुए कविगण व अतिथि गण का सन्मान सहित आभार प्रकट किया. जयहिंद
देवी नागरानी
1 Comment
August 17, 2008 at 5:20 pm (ग़ज़ल-देवी नागरानी, चराग़े-दिल संग्रह)
ग़ज़लः ४१
बहारों का आया है मौसम सुहाना
नये साज़ पर कोई छेड़ो तराना.
ये कलियां, ये गुंचे ये रंग और खुशबू
सदा ही महकता रहे आशियाना.
हवा का तरन्नुम बिखेरे है जादू
कोई गीत तुम भी सुनाओ पुराना.
चलो दोस्ती की नई रस्म डालें
हमें याद रखेगा सदियों जमाना.
खुशी बाँटने से बढ़ेगी जि़यादा
नफ़े का है सौदा इसे मत गवाना.
मैं देवी खुदा से दुआ मांगती हूं
बचाना, मुझे चश्मे-बद से बचाना.
चराग़े-दिल/ ६७
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