ग़ज़लः २७
चोट ताज़ा कभी जो खाते हैं
ज़ख्मे-दिल और मुस्कराते हैं.
मयकशी से ग़रज़ नहीं हमको
तेरी आँखों में डूब जाते हैं.
जिनको वीरानियों ही रास आईं
कब नई बस्तियां बसाते हैं.
शाम होते ही तेरी यादों के
दीप आंखों में झिलमिलाते हैं.
कूछ तो गुस्ताख़ियों को मुहलत दो
अपनी पलकों को हम झुकाते हैं.
तुम तो तूफाँ से बच गई देवी
लोग साहिल पे डूब जाते हैं.
चराग़े-दिल/ ५३




mehhekk said,
December 16, 2007 at 4:29 am
कूछ तो गुस्ताख़ियों को मुहलत दो
अपनी पलकों को हम झुकाते हैं.
behad umda laga ye sher,aur akhari bhi,tum to tufan se bach gayi devi,log sahil mein dub jate hai,wah wah.
मीनाक्षी said,
December 16, 2007 at 4:41 am
तुम तो तूफाँ से बच गई देवी
लोग साहिल पे डूब जाते हैं.
आखिर में बहुत खूबसूरत मोड़ दे दिया.. बहुत खूब …
Asha Joglekar said,
December 16, 2007 at 7:25 am
जिनको वीरानियों ही रास आईं
कब नई बस्तियां बसाते हैं.
बहोत खूब ।
Asha Joglekar said,
December 16, 2007 at 7:42 am
जिनको वीरानियों ही रास आईं
कब नई बस्तियां बसाते हैं.
बहोत खूब ।
neeraj said,
December 16, 2007 at 8:31 am
कूछ तो गुस्ताख़ियों को मुहलत दो
अपनी पलकों को हम झुकाते हैं.
आदरनिये दीदी
क्या शेर लिखा है आपने.वाह! वाह!! वाह!!! सुभानाल्लाह. आप को पढ़ना हमेशा एक नया अनुभव देता है. इस ग़ज़ल के सारे शेर बेहद खूबसूरत बन पड़े हैं. शब्द और भाव का अद्भुत मेल है इसमें. बधाई
नीरज
mahendra mishra said,
December 16, 2007 at 9:41 am
बहुत सुंदर बहुत खूब …
धन्यवाद
दीपक भारतदीप said,
December 16, 2007 at 9:52 am
जिनको वीरानियों ही रास आईं
कब नई बस्तियां बसाते
——————-
बहुत बड़ा दर्शन हैं इन पंक्तियों में
दीपक भारतदीप
Devi Nangrani said,
December 16, 2007 at 4:55 pm
Meenakshiji
Mehhekk
Gazal ke in sheron par apne ahsaas prakat karne ke liye abhari hoon. yahi ahsaas zinda rahe.
Naye saal ki shubhkamnaon ke saath
Devi
mehhekk said,
December 17, 2007 at 4:31 am
aaj phir se aa gayi ye ghazal padhne,devi ji behad dil khichi hai ye ghazal,jubaani yaad ho gayi aab,na jane kal se ktini bar padh chuki hun,aafrin.
Meet said,
December 17, 2007 at 6:05 pm
Devi, kya kahuuN ? Kya kya kahuuN ? Bahut din baad ……….. Bas, bahut khushii huyii ..
Devi Nangrani said,
December 21, 2007 at 10:14 pm
हैरान हूँ कि क्या कहूँ, किससे कहूँ, और कब कहूँ
ये वक्त भी तो साथ निभाता नहीं है है अब.
सभी की अभारी
नये साल की शुभकामनाओं के साथ
देवी