छवि २:. साथी‍‌

 

 

chavi-2.jpg

 

तन के साथी, मन के साथी
मिलकर बोझ उठाएँगे
मेहनत मजदूरी को दोनों
अपना ध्येय बनाएँगे.

 

पत्थर गारा जो भी होगा
हाथ से हाथ बटाएँगे
एक हंसे दूजा मुस्काये
मिलकर बोझ उठाएँगे.

 

वादा किया जो इक दूजे से
मिलकर उसे निभाएँगे
जीवन पथ पर कदम मिलाकर
दोनों बढ़ते जाएँगे.

2 Comments

  1. November 22, 2007 at 9:55 pm

    sundar chitaran…

  2. ramadwivedi said,

    November 23, 2007 at 2:04 pm

    Devi ji,
    sundar bhaav hai….badhaayi


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