November 14, 2007 at 11:03 pm (चित्रावली)
रेतीले कण कण में इस वीरान दायरे के अंदर खामोशी का दुशाला ओढे़ खड़ा है यकटक पूरी आन बान के साथ ऊपर आसमान की ओर देखता हुआ द्रढ़ सा नागफनी मानो कह रहा हो ” मैं अकेला नहीं हूँ तन्हाई मेरे साथ है”
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