कितने पिये है दर्द

चराग़े- दिल गज़ल-संग्रह


“न बुझा सकेंगी ये आंधियां

ये चराग़े‍‍ दिल है दिया नहीं” देवी नागरानी

गजलः 1
कितने पिये है दर्द के, आंसू बताऊं क्या
ये दास्ताने-ग़म भी किसी को सुनाऊं क्या?

िश्तों के आईने में दरारें हैं पड़ गईं
अब आईने से चेहरे को अपने छुपाऊं क्या?

दूश्मन जो आज बन गए, कल तक तो भाई थे
मजबूरियां हैं मेरी, मैं उनसे छुपाऊं क्या?

ारों तरफ से तेज़ हवाओं में हूं घिरी
इन आँधियों के बीच में दीपक जलाऊं क्या?

ीवानगी में कट गए मौसम बहार के
अब पतझड़ों के खौफ से दामन बचाऊं क्या?

ाजि़श मेरे खि़लाफ मेरे दोस्तों की थी
इल्ज़ाम दुशमनों पे मैं ‘देवी’ लगाऊं क्या?

चराग़े-दिल/२७

  • Blog Stats

  • Meta

  • Follow

    Get every new post delivered to your Inbox.